Parle Melody chocolate : पीएम मोदी ने मेलोनी को दी पारले की आइकॉनिक टॉफी! 1980 की क्लासिक टॉफी फिर वायरल, जानें कैसे बना इसका फेमस टैगलाइन

Parle की मशहूर मेलोडी टॉफी एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसकी वजह हाल ही में सामने आया एक वायरल पल बताया जा रहा है, जिसमें Narendra Modi और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच इस टॉफी को लेकर मजेदार बातचीत देखने को मिली। इसके बाद लोगों में बचपन की इस आइकॉनिक टॉफी को लेकर पुरानी यादें ताजा हो गईं।

Parle Melody chocolate : पीएम मोदी ने मेलोनी को दी पारले की आइकॉनिक टॉफी! 1980 की क्लासिक टॉफी फिर वायरल, जानें कैसे बना इसका फेमस टैगलाइन

Parle Melody chocolate / IMAGE SOURCE : x

Modified Date: May 20, 2026 / 02:53 pm IST
Published Date: May 20, 2026 2:51 pm IST
HIGHLIGHTS
  • मेलोडी टॉफी एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल
  • पीएम मोदी–मेलोनी के मजेदार पल के बाद चर्चा में आई
  • 1980 के दशक में हुई थी मेलोडी की शुरुआत

नई दिल्ली : Parle Melody chocolate एक जमाना था जब हर गली-मोहल्ले की किराना दुकान के काउंटर पर कांच के बड़े डिब्बों में मेलोडी टॉफियां भरी रहती थीं। स्कूल में किसी बच्चे का जन्मदिन हो, तो दोस्तों के बीच मेलोडी बांटना सबसे बड़ी खुशी होती थी। बाहर से कारमेल और अंदर चॉकलेट से भरी यह टॉफी आज भी लोगों के बचपन की सबसे खूबसूरत याद है। इन दिनों यह टॉफी एक बार फिर से इंटरनेट पर जबरदस्त चर्चा में आ गई है। इसकी वजह एक हालिया वीडियो है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच इस टॉफी को लेकर एक मजेदार पल देखने को मिला। आइए जानते हैं कि आखिर मेलोडी टॉफी का सफर कैसे शुरू हुआ और यह इतनी मशहूर कैसे हुई।

जब बाजार में हुई मेलोडी की एंट्री

साल 1980 के दशक में भारत में टॉफी और कैंडी का बाजार बहुत तेजी से बढ़ रहा था। उस समय मार्केट में कैडबरी कंपनी की ‘एक्लीयर्स’ टॉफी का जलवा था। इसी बड़े मुकाबले के बीच ‘पार्ले’ कंपनी ने अपनी नई टॉफी ‘मेलोडी’ को बाजार में उतारा। मेलोडी का कॉन्सेप्ट भी थोड़ा वैसा ही था बाहर कारमेल और अंदर चॉकलेट। लेकिन पार्ले कंपनी अपनी इस टॉफी को बाकी सब से अलग और एक अनोखी पहचान देना चाहती थी।

90s Childhood Nostalgia Chocolates एक लाइन, जिसने बदल दी किस्मत

पार्ले ने अपनी विज्ञापन एजेंसी ‘एवरेस्ट’ को मेलोडी को मशहूर करने की जिम्मेदारी सौंपी। इसी दौरान एक ऐसी लाइन का जन्म हुआ जो आज 40 साल बाद भी लोगों की जुबान पर रटी हुई है। वह लाइन थी “मेलोडी इतनी चॉकलेटी कैसे है?” और इसका जवाब मिला “मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ!”

सुलेखा बाजपेयी ने लिखी थी लाइन

इस शानदार टैगलाइन को कॉपीराइटर सुलेखा बाजपेयी ने लिखा था। इस विज्ञापन के पीछे कंपनी की रणनीति लोगों के मन में यह उत्सुकता जगाने की थी कि आखिर इस टॉफी के अंदर ऐसा क्या खास है। यह तरीका पूरी तरह काम कर गया और मेलोडी बच्चों से लेकर बड़ों तक की पहली पसंद बन गई।

क्लासरूम से लेकर फिल्मों और मीम्स तक का सफर

मेलोडी के टीवी पर आने वाले विज्ञापन बेहद मजेदार होते थे। कभी खेल के मैदान में कोच पूछता कि ‘मेलोडी इतनी चॉकलेटी कैसे है?’, तो कभी स्कूल में टीचर यही सवाल करती दिखती थीं। हर बार जवाब वही होता था ‘मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ!’ इस विज्ञापन ने मेलोडी को देश के पॉप कल्चर का हिस्सा बना दिया। सालों बाद, 2019 में आई मशहूर फिल्म ‘छिछोरे’ में भी इस डायलॉग का बहुत मजेदार इस्तेमाल किया गया था। आज भी सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह के मीम्स बनते रहते हैं।

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लेखक के बारे में

I’m Sneha Singh, a journalist and storyteller committed to ethical, ground-level, and impact-oriented reporting. A Gold Medalist in Journalism And Mass Communication, I believe in telling stories with accuracy, sensitivity, and purpose. Currently working with IBC24, I specialize in content writing, news production, and modern storytelling bridging facts with human experiences to inform, engage, and inspire audiences..