ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल के सदस्यों ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से की मुलाकात

ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल के सदस्यों ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से की मुलाकात

ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल के सदस्यों ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से की मुलाकात
Modified Date: January 11, 2026 / 08:05 pm IST
Published Date: January 11, 2026 8:05 pm IST

नयी दिल्ली, 11 जनवरी (भाषा) ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल के सदस्यों ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात करने के बाद रविवार को कहा कि वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों में शांति और राष्ट्रीय एकजुटता की रक्षा करना केवल सरकार ही नहीं, बल्कि धार्मिक नेताओं समेत अन्य सभी लोगों की भी जिम्मेदारी है।

काउंसिल ने एक बयान में कहा कि संगठन “मेरा देश, मेरी पहचान” अभियान के तहत देश के प्रत्येक राज्य और शहर में राष्ट्रीय एकता और भाईचारे का संदेश फैलाएगा।

इसके मुताबिक डोभाल से मुलाकात करने वाले ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व काउंसिल प्रमुख और दरगाह अजमेर शरीफ के सज्जादा नशीन के उत्तराधिकारी सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने किया।

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बयान में कहा गया है कि डोभाल के साथ मुलाकात के दौरान देश में शांति, एकता और समावेशी राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने में सूफी परंपरा की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई।

सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने बाद में पत्रकारों से कहा कि वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों में शांति और राष्ट्रीय एकजुटता की रक्षा करना केवल सरकार ही नहीं, बल्कि धार्मिक नेताओं, नागरिक समाज, मीडिया और आम जनता की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सूफी परंपरा प्रेम,सहिष्णुता और भाईचारे का संदेश देती है, जो सदियों से भारत की बहुलतावादी संस्कृति की नींव रही है और आज भी उग्रवाद के खिलाफ एक सशक्त शक्ति है।

नसीरुद्दीन ने बताया कि “मेरा देश, मेरी पहचान” अभियान के तहत ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल देश के प्रत्येक राज्य और शहर में शांति, संवैधानिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और भाईचारे का संदेश फैलाएगी।

आगरा स्थित दरगाह फतेहपुरी सीकरी के सज्जादा नशीन और ऑल इंडिया सूफी सज्जादा नशीन काउंसिल के उपाध्यक्ष अरशद फरीदी ने पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी अत्याचार और हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि ऐसे कृत्य न केवल मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन हैं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों के भी विरुद्ध हैं।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में सूफियों और सूफी परंपरा से जुड़े लोगों की बड़ी संख्या मौजूद है, इसके बावजूद अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।

फरीदी ने कहा कि सूफीवाद प्रेम, शांति, सहिष्णुता और पारस्परिक सम्मान का संदेश देता है, जो समाज में बढ़ती नफरत और विभाजन को समाप्त करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

भाषा नोमान सुरेश पवनेश

पवनेश


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