एमजी विश्वविद्यालय ने छात्रसंघ को कॉकरोच वाले पोस्टर हटाने का निर्देश दिया, एसएफआई ने किया प्रदर्शन
एमजी विश्वविद्यालय ने छात्रसंघ को कॉकरोच वाले पोस्टर हटाने का निर्देश दिया, एसएफआई ने किया प्रदर्शन
कोट्टायम (केरल), 27 जुलाई (भाषा) महात्मा गांधी विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने राष्ट्रीय सम्मेलन से पहले एसएफआई नियंत्रित छात्रसंघ को कॉकरोच की तस्वीर और दिल्ली में नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर हुए छात्र आंदोलन से जुड़े दृश्य वाले पोस्टर हटाने का निर्देश दिया है।
हालांकि, छात्रसंघ के अध्यक्ष और सचिव सहित पदाधिकारियों के नेतृत्व में छात्रों ने सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में विरोध मार्च निकाला।
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) का छात्र संगठन है।
तीन से छह अगस्त तक प्रस्तावित राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रचार के लिए लगाए गए कई पोस्टर में कॉकरोच की तस्वीर के साथ सामाजिक कार्यकर्ता रिया आहिर का वह चित्र है, जिसमें वह मुंबई में कथित नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस वाहन के सामने खड़ी दिखाई दे रही हैं।
ये पोस्टर विश्वविद्यालय परिसर में लगाए गए हैं और सोशल मीडिया मंचों पर भी प्रसारित किए गए हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने 25 जुलाई को अंतरिम कुलपति डी. मावुथु द्वारा जारी एक परिपत्र का हवाला देते हुए कहा कि ‘‘विश्वविद्यालय निधि से आयोजित किसी भी कार्यक्रम में किसी भी प्रकार की राजनीति की अनुमति नहीं होगी।’’
परिपत्र में यह भी कहा गया है कि ऐसे कार्यक्रमों में विश्वविद्यालय के प्रतीक चिह्न का उपयोग करने से पहले पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा और प्रचार सामग्री पर अनुमति देने वाले प्राधिकारी का नाम भी अंकित किया जाना चाहिए।
विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष अभिनव एम. ने आरोप लगाया कि प्रशासन को विशेष रूप से इन पोस्टर पर इसलिए आपत्ति है क्योंकि इनमें कॉकरोच की तस्वीर और दिल्ली के छात्र आंदोलन का उल्लेख किया गया है।
उन्होंने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा, ‘‘हम पोस्टर नहीं हटाएंगे। दिल्ली का आंदोलन छात्रों ने किया था और वर्तमान परिस्थितियों में उसका विशेष महत्व है। हमारा कार्यक्रम भी छात्रों के लिए है और उस प्रदर्शन का उल्लेख करना हमारा अधिकार है।’’
अभिनव ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जबरन पोस्टर हटाए तो छात्रसंघ अपना आंदोलन और तेज करेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि पोस्टर जबरन हटाए गए तो हम परिसर में अपना विरोध जारी रखेंगे। विश्वविद्यालय छात्रसंघ, छात्रों से एकत्र किए गए धन से संचालित होता है।’’
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब विपक्ष अंतरिम कुलपति मावुथु पर भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में काम करने का आरोप लगा रहा है। मावुथु की नियुक्ति राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने की है।
विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया है कि भाजपा समर्थकों को विश्वविद्यालय की ‘सीनेट’ और ‘सिंडिकेट’ में शामिल किया गया है।
इन आरोपों को खारिज करते हुए कुलपति कार्यालय के अधिकारियों ने कहा कि परिपत्र किसी विशेष राजनीतिक संगठन या आंदोलन को ध्यान में रखकर जारी नहीं किया गया था।
इस संबंध में एक अधिकारी ने ‘पीटीआई भाषा’ से कहा, ‘‘निर्देश केवल परिपत्र को लागू करने के लिए दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि विश्वविद्यालय निधि से आयोजित कार्यक्रमों में किसी भी प्रकार की राजनीति की अनुमति नहीं होगी। यदि विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न इस्तेमाल किया जाता है तो पूर्व अनुमति अनिवार्य है। इसी आधार पर छात्रसंघ को पोस्टर हटाने के लिए कहा गया है।’’
अधिकारियों ने कहा कि यदि पोस्टर नहीं हटाए गए तो विश्वविद्यालय छात्रसंघ से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।
भाषा
शुभम नेत्रपाल
नेत्रपाल

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