पश्चिम एशिया संकट: विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष से बात की

पश्चिम एशिया संकट: विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष से बात की

पश्चिम एशिया संकट: विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने ईरानी समकक्ष से बात की
Modified Date: March 13, 2026 / 03:04 pm IST
Published Date: March 13, 2026 3:04 pm IST

नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार रात टेलीफोन पर अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से बात की। पश्चिम एशिया संकट शुरू होने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बातचीत है, जो ऐसे समय हुई है जब भारत होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर खड़े 28 व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के प्रयासों को तेज कर रहा है।

अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमला किए जाने के तुरंत बाद जयशंकर और अराघची ने 28 फरवरी को बातचीत की थी। इसके बाद उन्होंने 5 मार्च और 10 मार्च को भी बात की थी।

जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘बीती रात ईरानी विदेश मंत्री अराघची से एक और बातचीत हुई। द्विपक्षीय मामलों के साथ-साथ ब्रिक्स से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा हुई।’’

बीती रात फोन पर बातचीत ऐसे समय में हुई जब भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रणनीतिक जहाजरानी मार्ग से भारतीय ध्वज वाले व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करने के प्रयासों को तेज कर दिया है। इस समुद्री मार्ग को अमेरिका-इजराइल के साथ संघर्ष बढ़ने के बाद ईरान ने आंशिक रूप से अवरुद्ध कर दिया है।

ईरान की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि अराघची ने अपने भारतीय समकक्ष को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए ‘‘हमलों और अपराधों’’ के परिणामस्वरूप उत्पन्न हुई नवीनतम स्थिति और क्षेत्र तथा विश्व की स्थिरता एवं सुरक्षा पर इसके परिणामों के बारे में जानकारी दी।

इसमें कहा गया कि ईरानी विदेश मंत्री ने जयशंकर के साथ बातचीत के दौरान आत्मरक्षा के वैध अधिकार का प्रयोग करने के लिए तेहरान की दृढ़ इच्छाशक्ति पर जोर दिया।

बयान में कहा गया, ‘‘अराघची ने ईरान के खिलाफ सैन्य आक्रामकता की निंदा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मंचों तथा संगठनों की आवश्यकता पर जोर दिया।’’

इसमें कहा गया, ‘‘बहुपक्षीय सहयोग विकसित करने के मंच के रूप में ब्रिक्स की भूमिका और स्थिति के महत्व का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इस संस्था के लिए क्षेत्र और विश्व में स्थिरता एवं सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाना आवश्यक है।’’

बयान में कहा गया कि अराघची ने क्षेत्र में स्थिरता और सतत सुरक्षा स्थिति को मजबूत करने का तरीका खोजने के महत्व पर जोर दिया और इसे ‘‘सामूहिक आवश्यकता’’ बताया।

भाषा

नेत्रपाल नरेश

नरेश


लेखक के बारे में