पश्चिम एशिया संकट : विदेशमंत्री जयशंकर ने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियों से बातचीत की

पश्चिम एशिया संकट : विदेशमंत्री जयशंकर ने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियों से बातचीत की

पश्चिम एशिया संकट : विदेशमंत्री जयशंकर ने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियों से बातचीत की
Modified Date: March 24, 2026 / 12:38 am IST
Published Date: March 24, 2026 12:38 am IST

नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं की बातचीत पश्चिम एशिया संघर्ष के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले परिणामों पर केंद्रित रहा।

जयशंकर और रुबियो की बातचीत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए दी गई सीमा को पांच दिनों के लिए बढ़ाए जाने के कुछ घंटों बाद हुई।

विदेशमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ने कहा कि उनकी रूबियो के साथ फोन कॉल पर विस्तृत बातचीत हुई, जिसमें प्रमुख रूप से पश्चिम एशिया संघर्ष पर चर्चा की गई।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी चर्चा पश्चिम एशिया संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव पर केंद्रित थी। हमने विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर बात की। संपर्क में रहने पर सहमति बनी।’’

पश्चिम एशिया संघर्ष से संबंधित एक अन्य घटनाक्रम में जयशंकर ने खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देशों के राजदूतों से मुलाकात की और हालात पर चर्चा की।

विदेशमंत्री ने जीसीसी सदस्य छह देशों के राजदूतों से मुलाकात के बाद कहा, ‘‘पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर विचारों का आदान-प्रदान किया। क्षेत्र में भारतीय समुदाय को उनके निरंतर समर्थन के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।’’

इस बैठक में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ओमान, कतर, बहरीन और कुवैत के राजदूतों ने हिस्सा लिया।

समझा जाता है कि इस बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत की चिंताओं पर चर्चा हुई।

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है। इस जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल और एलएनजी (तरल प्राकृतिक गैस) का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।

पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा खरीद का एक प्रमुख स्रोत रहा है।

जयशंकर ने अपने श्रीलंकाई समकक्ष विजेता हेराथ से भी बातचीत की।

विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया मंच पर कहा, ‘‘पश्चिम एशिया संघर्ष के परिणामों पर चर्चा की। भारत ‘पड़ोसी सर्वोपरि’ और ‘विजन महासागर’ के प्रति प्रतिबद्ध है।’’

भाषा धीरज रंजन

रंजन


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