जयपुर के पास बोरखेड़ा तालाब में लद्दाख-मंगोलिया से आए प्रवासी पक्षी राजहंस बने आकर्षण का केन्द्र
जयपुर के पास बोरखेड़ा तालाब में लद्दाख-मंगोलिया से आए प्रवासी पक्षी राजहंस बने आकर्षण का केन्द्र
जयपुर, 18 मार्च (भाषा) सर्दी के जाने के साथ-साथ राजस्थान की झीलों और तालाबों से प्रवासी पक्षियों की विदाई लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन जयपुर के निकट चाकसू क्षेत्र में बोरखेड़ा गांव का तालाब इन दिनों एक अलग ही कहानी बयां कर रहा है।
लद्दाख, मंगोलिया और तिब्बती पठार में पाए जाने वाले और सर्दी में उच्च हिमालय को पार कर दक्षिण एशिया की ओर प्रवास करने वाले प्रवासी पक्षी ‘बार हेडेड गूज’ जयपुर के निकट डेरा डाले हुए हैं। एक-दो की नहीं बल्कि 500 से अधिक ‘बार-हेडेड गूज’ के तीन बड़े-बड़े झुंड पक्षी प्रेमियों के आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं।
पक्षी विशेषज्ञ डॉ. कमलेश शर्मा ने बताया कि स्थानीय बोलचाल में राजहंस के नाम से जाने-पहचाने वाले बार-हेडेड गूज सबसे ऊंचाई तक उड़ान भरने वाले पक्षियों में गिने जाते हैं। ये पक्षी 12,000 से 14,000 फुट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकते हैं और प्रतिदिन बिना रुके लगभग 1,600 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम होते हैं।
उन्होंने बताया कि इनके शरीर में पाया जाने वाला विशेष प्रकार का हीमोग्लोबिन कम ऑक्सीजन वाले वातावरण में भी अधिक ऑक्सीजन अवशोषित करने में मदद करता है, जिससे ये हिमालय के ऊंचे दर्रों को पार कर पाते हैं।
पक्षी विशेषज्ञ शर्मा ने बताया कि बोरखेड़ा तालाब का अधिकांश हिस्सा सूख चुका है, लेकिन पांच अलग-अलग हिस्सों में बचा पानी इन मेहमानों के लिए फिलहाल ठिकाना बना हुआ है। सूखते जलाशय के बीच बची छोटी-छोटी जलधाराओं में सैकड़ों बार-हेडेड गूज का झुंड दिनभर सक्रिय रहता है। ये पक्षी स्थानीय जल पक्षियों के साथ तैरते, उड़ते और जल क्रीड़ा करते दिखाई देते हैं।
एक साथ इतनी बड़ी संख्या में यहां इन पक्षियों की उपस्थिति के बारे में पर्यावरण विज्ञानी और सेवानिवृत्त वन अधिकारी डॉ. सतीश कुमार शर्मा बताते हैं कि इन दिनों तापमान में उतार-चढ़ाव हो रहा है। ऐसे में कम मानवीय गतिविधि व सुरक्षित वातावरण की अनुकूलता देख पक्षी यहां रुके हुए हैं।
उन्होंने बताया कि बार हेडेड गूज पूर्णतया शाकाहारी पक्षी हैं और यहां मौजूद जलीय वनस्पतियों के साथ आस-पास के क्षेत्र में नर्म घास, खुला व सुरक्षित क्षेत्र और अपेक्षाकृत शांत वातावरण प्रवासी पक्षियों को कुछ समय और ठहरने के लिए अनुकूल परिस्थितियां प्रदान कर रहे हैं।
भाषा बाकोलिया जोहेब
जोहेब

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