यह सोच बदलनी होगी कि हरियाली की जरूरत सिर्फ दिल्ली को है : उच्चतम न्यायालय

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यह सोच बदलनी होगी कि हरियाली की जरूरत सिर्फ दिल्ली को है : उच्चतम न्यायालय

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  • Publish Date - March 16, 2026 / 08:16 PM IST,
    Updated On - March 16, 2026 / 08:16 PM IST

नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली रिज से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यह सोच बदलनी होगी कि केवल राष्ट्रीय राजधानी को ही हरियाली की जरूरत है और अन्य राज्यों पर इसका कम असर पड़ता है।

अरावली पर्वत श्रृंखला का ही एक विस्तार रिज दिल्ली में स्थित है और यह एक पथरीला, पहाड़ी और वन क्षेत्र है। प्रशासनिक कारणों से इसे चार क्षेत्रों दक्षिण, दक्षिण-मध्य, मध्य और उत्तर में विभाजित किया गया है जो लगभग 7,784 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए हैं।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने टिप्पणी की कि हरित आवरण के मुद्दे पर एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।

पीठ ने कहा, ‘हमें यह सोच बदलने की जरूरत है कि राष्ट्रीय राजधानी होने के नाते केवल दिल्ली को हरियाली की जरूरत है और बाकी शहरों को नहीं।’

इस मामले में अदालत की सहायता कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता के. परमेश्वर ने उच्चतम न्यायालय के 11 नवंबर के फैसले का हवाला दिया, जिसमें केंद्र को दिल्ली रिज मैनेजमेंट बोर्ड (डीआरएमबी) को वैधानिक दर्जा देने और इसे रिज और ‘मॉर्फोलॉजिकल रिज’ से संबंधित सभी मामलों के लिए एकल-खिड़की प्राधिकरण बनाने का निर्देश दिया गया था।

तब न्यायालय ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3(3) के तहत औपचारिक रूप से डीआरएमबी का गठन करने का निर्देश दिया था।

सोमवार को सुनवाई के दौरान, केंद्र की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि पिछले साल एक दिसंबर को डीआरएमबी के गठन के संबंध में एक अधिसूचना जारी की गई थी।

पीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह हलफनामा दाखिल कर रिकॉर्ड पर यह विवरण पेश करे कि जंगलों और हरित क्षेत्रों के प्रबंधन तथा पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को देखने के लिए वैधानिक या गैर-वैधानिक समितियों का गठन कैसे किया गया है।

न्यायालय ने कहा कि हलफनामे में उन वैधानिक ढांचों पर भी स्पष्टीकरण होना चाहिए जिनके तहत विभिन्न निकायों का गठन किया गया है। पीठ ने कहा कि हलफनामा दो सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाए और उसके बाद मामले की सुनवाई की जाएगी।

सुनवाई के दौरान, पीठ को बताया गया कि विभिन्न समितियां राष्ट्रीय राजधानी और पूरे देश में हरित आवरण के मुद्दे पर गौर कर रही हैं।

भाषा आशीष नरेश

नरेश