मिजोरम सरकार 14 अप्रैल को सनाते नीत ‘हमार’ गुट के साथ शांति समझौता कर सकती है: अधिकारी

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मिजोरम सरकार 14 अप्रैल को सनाते नीत ‘हमार’ गुट के साथ शांति समझौता कर सकती है: अधिकारी

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  • Publish Date - April 7, 2026 / 07:58 PM IST,
    Updated On - April 7, 2026 / 07:58 PM IST

आइजोल, सात अप्रैल (भाषा) मिजोरम सरकार के 14 अप्रैल को विद्रोही समूह ‘हमार पीपुल्स कन्वेंशन-डेमोक्रेटिक’ (एचपीसी-डी) के लालहमिंगथांगा सनाते के नेतृत्व वाले गुट के साथ शांति समझौता करने की संभावना है। यह बात मंगलवार को एक अधिकारी ने कही।

अधिकारी ने बताया कि यह समझौता राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे गृह सचिव और सनाते के बीच, आइजोल जिले के सकावरदाई गांव में औपचारिक रूप से किया जाएगा।

संबंधित गांव राज्य के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित है और इसकी सीमा मणिपुर से लगती है।

सकावरदाई ‘सिनलुंग हिल्स काउंसिल’ (एसएचसी) मुख्यालय के रूप में भी कार्य करता है।

अधिकारी ने बताया कि फिलहाल 14 अप्रैल के लिए तय किया गया हस्ताक्षर समारोह विधायक और मुख्यमंत्री के सलाहकार (राजनीतिक) लालमुआनपुइया पुंते की उपस्थिति में आयोजित होगा।

उन्होंने कहा कि यह समझौता लगभग 40 एचपीसी (डी) कैडरों के औपचारिक आत्मसमर्पण को सुगम बनाएगा, जिससे उन्हें नागरिक जीवन में लौटने का अवसर मिलेगा।

एचपीसी (डी) हमिंगचुंगनुंगा के नेतृत्व वाले मूल ‘हमार पीपुल्स कन्वेंशन’ (एचपीसी) की एक शाखा है।

वर्ष 1986 में हमार समुदाय के लिए एक राजनीतिक मंच के रूप में स्थापित एचपीसी ने बाद में छठी अनुसूची के तहत एक स्वायत्त जिला परिषद (एडीसी) की मांग को लेकर सशस्त्र विद्रोह का रास्ता अपना लिया। यह मांग विशेष रूप से उत्तरी और पूर्वोत्तर मिजोरम के हमार-बहुल क्षेत्रों के लिए थी।

राज्य सरकार के साथ 1994 में हुए एक शांति समझौते के बाद, 31 गांवों की देखरेख के लिए ‘सिनलुंग हिल्स डेवलपमेंट काउंसिल’ का गठन किया गया।

हालांकि, समझौते की शर्तों से असंतुष्ट सनाते के नेतृत्व वाले एक गुट ने एडीसी की मांग फिर से शुरू कर दी और खुद को एचपीसी (डी) के रूप में नया नाम दे दिया।

सनाते के नेतृत्व वाला गुट, हालाँकि कम सक्रिय है, फिर भी इसे मिज़ोरम में अशांति फैलाने वाला अंतिम विद्रोही समूह माना जाता है।

भाषा नेत्रपाल पवनेश

पवनेश