इंफाल, सात अप्रैल (भाषा) मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में मंगलवार को एक विरोध-प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों लोगों ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के शिविर पर धावा बोल दिया और वाहनों को जला दिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों की ओर से की गई गोलीबारी में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए। यह जानकारी पुलिस ने दी।
मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदास कांथौजम ने बताया कि मोइरांग ट्रोंग्लाओबी इलाके में संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा किए गए बम हमले में दो बच्चों की मौत के विरोध में बड़ी संख्या में युवा और महिला प्रदर्शन कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने बम हमले वाली जगह से करीब सौ मीटर दूर गेलमोल के पास स्थित सीआरपीएफ शिविर पर धावा बोल दिया, वहां वाहनों को जलाया और संपत्तियों में तोड़फोड़ की।
मंत्री ने कहा, ‘‘मैंने प्रदर्शनकारियों से सीआरपीएफ शिविर में प्रवेश नहीं करने और सुरक्षा बलों को बम हमले में शामिल लोगों को पकड़ने के अभियान पर ध्यान केंद्रित करने देने का आग्रह किया था। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने मेरी अपील पर ध्यान नहीं दिया।’’
कांथौजम ने कहा, ‘‘उन्होंने (प्रदर्शनकारियों) सीआरपीएफ शिविर पर धावा बोल दिया, वाहनों को जलाया और शिविर के कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ की, जिसके कारण सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की। उन्होंने (सुरक्षा बलों) या तो आत्मरक्षा में या गुस्से में गोली चलाई। दुर्भाग्य से, गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गोली लगने से घायल हो गए।’’
बाद में पुलिस ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में घायलों की संख्या अद्यतन करते हुए 20 कर दी।
ऐसा प्रतीत होता है कि प्रदर्शनकारी उग्रवादियों के खिलाफ कथित तौर पर कार्रवाई करने में विफल रहने को लेकर सुरक्षा बलों से नाखुश थे।
अधिकारियों ने बताया कि घायलों को कई अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर झूठी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।
मई 2023 में मणिपुर में इंफाल घाटी के मेइती और पहाड़ी इलाकों के कुकी-जो समूहों के बीच भड़की जातीय हिंसा में कम से कम 260 लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
भाषा अमित पारुल
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