एनएचआरसी कोर समूह ने खाद्य नमूनों की समय पर जांच के लिए समर्पित हेल्पलाइन स्थापना की सिफारिश की

Ads

एनएचआरसी कोर समूह ने खाद्य नमूनों की समय पर जांच के लिए समर्पित हेल्पलाइन स्थापना की सिफारिश की

  •  
  • Publish Date - April 7, 2026 / 10:24 PM IST,
    Updated On - April 7, 2026 / 10:24 PM IST

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) खाद्य एवं पोषण के अधिकार पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के एक कोर समूह ने खाद्य नमूनों की समयबद्ध तरीके से जांच के लिए एक बहुक्षेत्रीय निगरानी प्रणाली स्थापित करने और एक मजबूत ढांचा तैयार करने की सिफारिश की है।

कोर समूह ने इसके साथ ही खाद्य नमूनों की गुणवत्ता की ‘वास्तविक समय में निगरानी’ के लिए लागत प्रभावी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) उपकरण विकसित करने की भी सिफारिश की है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मंगलवार को कहा कि समूह द्वारा दिए गए अन्य सुझावों में एक समर्पित उपभोक्ता हेल्पलाइन की स्थापना, सार्वजनिक और निजी खाद्य भंडारण गोदामों के लिए मानक निर्धारित करना और विक्रेताओं को फलों और सब्जियों को बेहतर दिखाने के लिए रंगों का उपयोग नहीं करने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है।

आयोग ने दिल्ली स्थित अपने परिसर में ‘भारत में खाद्य मिलावट से निपटना: पैमाने, चुनौतियों और सुधारों को समझना’ विषय पर खाद्य और पोषण के अधिकार पर कोर ग्रुप की एक बैठक की मेजबानी की, जिसमें कुछ प्रतिभागियों ने डिजिटल तरीके से भाग लिया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन (सेवानिवृत्त) ने खाद्य मिलावट से निपटने के लिए भारत के कानूनी ढांचे का व्यापक अवलोकन प्रस्तुत किया, जिसमें मद्रास मिलावट निवारण अधिनियम 1918 से लेकर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 तक के इसके विकास का वर्णन किया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दशकों से कई स्तरों पर मिलावट को रोकने के लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जीवन प्रत्याशा में वृद्धि के साथ ही जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होना चाहिए, जैसा कि संविधान के तहत गारंटीकृत है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ और रोगमुक्त जीवन जीने का अधिकार है और हितधारकों से आग्रह किया कि वे केवल आंकड़ों पर निर्भर रहने के बजाय मिलावटी खाद्य प्रदार्थ के व्यापक प्रभाव पर विचार करें।

एनएचआरसी द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, चर्चा से निकले कुछ सुझावों में एक प्रणाली-व्यापी सुधार दृष्टिकोण अपनाना शामिल था, जिसमें ‘खाद्य उत्पादों के संपूर्ण जीवनचक्र का मानचित्रण’, प्रत्येक चरण में संदूषण बिंदुओं की पहचान और जैव निगरानी सहित वैज्ञानिक निगरानी को नियामक ढांचों में एकीकृत करना शामिल था।

अन्य सिफारिशों में खाद्य सुरक्षा प्रणालियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना; खाद्य सुरक्षा के संबंध में गलत धारणाओं को दूर करने और दिखावटी प्राथमिकताओं के कारण होने वाली बर्बादी को कम करने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाना; उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन के वैज्ञानिक रूप से मान्य संकेतकों के बारे में शिक्षित करना शामिल है। इसके साथ ही इसमें खाद्य गुणवत्ता की वास्तविक समय की निगरानी को सक्षम करने और छेड़छाड़-रहित अभिलेखों के माध्यम से पता लगाने की क्षमता सुनिश्चित करने के वास्ते लागत प्रभावी एआई उपकरण विकसित करना शामिल है।

इसके अलावा, कोर ग्रुप ने उपभोक्ता विश्वास बनाने के लिए खाद्य सुरक्षा डेटा, निरीक्षण रिपोर्ट और विक्रेता अनुपालन स्थिति को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराकर अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया है। साथ ही परीक्षण सुविधाओं को मजबूत करने और खाद्य परीक्षण प्रक्रियाओं में अधिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ एक समर्पित उपभोक्ता हेल्पलाइन की स्थापना करने की भी बात कही है।

भाषा अमित दिलीप

दिलीप