असम समझौते के तहत 40 वर्षों में 1.7 लाख से अधिक अवैध विदेशियों का पता चला: मंत्री

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असम समझौते के तहत 40 वर्षों में 1.7 लाख से अधिक अवैध विदेशियों का पता चला: मंत्री

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  • Publish Date - February 18, 2026 / 07:00 PM IST,
    Updated On - February 18, 2026 / 07:00 PM IST

गुवाहाटी, 18 फरवरी (भाषा) असम समझौते के प्रावधानों के तहत अब तक राज्य में 1.7 लाख से अधिक अवैध विदेशियों का पता लगाया जा चुका है, जबकि पिछले 40 वर्षों में लगभग 31,000 लोगों को वापस भेजा जा चुका है। विधानसभा में बुधवार को यह जानकारी दी गयी।

असम समझौते के कार्यान्वयन मंत्री अतुल बोरा ने यह भी कहा कि असम में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका है, सिवाय 4.35 किलोमीटर के उस हिस्से के, जिस पर पड़ोसी देश के सीमा निगरानी बल ने आपत्ति जताई है।

बोरा असम गण परिषद (एजीपी) के विधायक रामेंद्र नारायण कलिता के उस प्रश्न का उत्तर दे रहे थे, जो 15 अगस्त, 1985 को अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ छह साल लंबे हिंसक आंदोलन के अंत में हस्ताक्षरित असम समझौते के बारे में था।

समझौते में अन्य प्रावधानों के साथ-साथ यह भी कहा गया था कि 25 मार्च, 1971 को या उसके बाद असम आने वाले सभी विदेशियों के नाम मतदाता सूची से खोजकर हटा दिए जाएंगे और उन्हें निर्वासित करने की कार्रवाई की जाएगी। 1966 से 1971 के बीच राज्य में आए प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्राप्त होगी।

मंत्री ने कहा कि समझौते के प्रावधान के अनुसार, 31 दिसंबर, 2025 तक 1971 के बाद राज्य में प्रवेश करने वाले 1,37,152 अवैध अप्रवासियों और 1966 और 1971 के बीच आने वाले 33,485 अन्य लोगों की पहचान कर उन्हें विदेशी घोषित कर दिया गया है।

1985 से 12 मार्च 2013 तक, ‘पुश बैक’ प्रक्रिया के माध्यम से 29,663 अवैध विदेशियों को उनके देश वापस भेज दिया गया।

असम में ‘पुश बैक’ प्रक्रिया का उद्देश्य अवैध प्रवासियों, मुख्य रूप से बांग्लादेशियों को बिना औपचारिक प्रत्यर्पण संधि के, सीधे अंतरराष्ट्रीय सीमा पार धकेलना है।

बोरा ने कहा कि 13 मार्च, 2013 और 31 जनवरी, 2026 के बीच, ‘निर्वासन’ प्रक्रिया के माध्यम से 468 लोगों को वापस भेजा गया, जिनमें से 458 दोषी विदेशी थे और 10 घोषित विदेशी थे।

गृह मंत्रालय के आदेशों के अनुसार, एक फरवरी, 2025 और 31 जनवरी, 2026 के बीच 1,421 अन्य अवैध विदेशियों को ‘वापस भेज दिया गया’।

इसके अलावा, 20 दिसंबर, 2025 से 31 जनवरी, 2026 तक, आप्रवासी (असम से निष्कासन) अधिनियम, 1950 के तहत 51 घोषित विदेशियों और एक अन्य अवैध आप्रवासी को देश से निष्कासित कर दिया गया है।

भाषा

प्रशांत पवनेश

पवनेश