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Ramadan India 2026: नई दिल्ली: भारत में पवित्र इस्लामी महीने रमजान 2026 का आगाज हो गया है। बुधवार, 18 फरवरी की शाम देश के कई प्रमुख शहरों में रमजान का चांद दिखाई देने की पुष्टि के बाद मुस्लिम समुदाय में खुशी की लहर दौड़ गई। राजधानी दिल्ली, मुंबई, लखनऊ और हैदराबाद समेत देशभर में चांद का दीदार होने के साथ ही आज ‘चांद रात’ मनाई जा रही है। इसके साथ ही 19 फरवरी, गुरुवार से पूरे भारत में रमजान के रोजों की शुरुआत होगी और लोग साल का पहला रोजा रखेंगे।
बुधवार शाम सूर्यास्त के बाद से ही मस्जिदों, ईदगाहों और घरों की छतों पर लोग चांद देखने के लिए इकट्ठा होने लगे थे। पुरानी दिल्ली स्थित ऐतिहासिक फतेहपुरी मस्जिद और शहरों की मरकजी हिलाल कमेटियों ने चांद दिखाई देने की आधिकारिक पुष्टि की। वहीं लखनऊ की ऐशबाग ईदगाह तथा मुंबई की हिलाल कमेटी ने भी घोषणा की कि शाबान का महीना 29 दिनों का रहा और अब रमजान का महीना शुरू हो चुका है।
चांद दिखने की खबर के साथ ही देशभर की मस्जिदों में विशेष नमाज ‘तरावीह’ का सिलसिला बुधवार रात से शुरू हो गया है। रमजान के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग लगातार एक महीने तक रोजा रखते हैं। इसमें सूर्योदय से पहले सहरी (सेहरी) की जाती है और सूर्यास्त के बाद रोजा इफ्तार से खोला जाता है। इस महीने को आत्मशुद्धि, संयम और दान का प्रतीक माना जाता है। मस्जिदों में नमाज, कुरआन की तिलावत और इबादत का माहौल बन गया है।
रमजान की शुरुआत चांद दिखने पर निर्भर होती है, इसलिए अलग-अलग देशों में इसकी तिथि बदलती रहती है। इस वर्ष सऊदी अरब, यूएई और अन्य खाड़ी देशों में रमजान का चांद 17 फरवरी को ही दिखाई दे गया था, जिसके बाद वहां 18 फरवरी से पहला रोजा रखा जा चुका है। भारत में परंपरागत रूप से खाड़ी देशों के एक दिन बाद चांद दिखाई देता है, इसलिए यहां 19 फरवरी से रोजों की शुरुआत हो रही है।
रमजान का चांद नजर आते ही बाजारों और मुस्लिम बहुल इलाकों में रौनक बढ़ गई है। लोग सेहरी और इफ्तार के लिए खाद्य सामग्री, खजूर, सूखे मेवे, फल, कपड़े और इत्र की खरीदारी में जुट गए हैं। मिठाई और पारंपरिक पकवानों की दुकानों पर भी भीड़ बढ़ने लगी है। चांद रात के मौके पर खासतौर पर महिलाएं और बच्चे खरीदारी करते नजर आए।
19 फरवरी को राजधानी दिल्ली में सहरी का समय सुबह लगभग 05:36 बजे समाप्त होगा, जबकि इफ्तार का समय शाम करीब 06:15 बजे रहेगा। अलग-अलग शहरों में भौगोलिक स्थिति के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। धार्मिक विद्वानों ने रोजेदारों से स्थानीय मस्जिदों द्वारा घोषित समय का पालन करने की अपील की है।