एम्स के ‘सीएमई’ कार्यक्रम में 400 से अधिक पेशेवर शामिल

एम्स के ‘सीएमई’ कार्यक्रम में 400 से अधिक पेशेवर शामिल

एम्स के ‘सीएमई’ कार्यक्रम में 400 से अधिक पेशेवर शामिल
Modified Date: August 18, 2026 / 07:16 pm IST
Published Date: August 18, 2026 7:16 pm IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) भारत में स्ट्रोक बीमारी की रोकथाम और शुरुआती पहचान से लेकर उन्नत उपचार का दायरा बढ़ाने पर चर्चा के लिए दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के तंत्रिका विज्ञान विभाग और इंडियन स्ट्रोक एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम में 400 से अधिक स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लिया।

‘‘सेव द ब्रेन-स्ट्रोक प्रिवेंटेबल एंड ट्रीटेबल’’ नामक विषय पर आधारित यह कार्यक्रम पिछले दिनों आयोजित किया गया था। यह कार्यक्रम मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं की जांच की विधि ‘सेरेब्रल एंजियोग्राफी’ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया जिसमें इसके अग्रदूत एगास मोनिज को श्रद्धांजलि दी गई।

इस कार्यक्रम में स्ट्रोक की रोकथाम, समय पर निदान, आपात उपचार, पुनर्वास और सामुदायिक जागरुकता को मजबूत करने पर बल दिया गया।

एम्स-दिल्ली के निदेशक डॉ. निखिल टंडन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्ट्रोक चिकित्सा की दिशा तंत्रिका संबंधी कमियों की पहचान से आगे बढ़कर मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बचाने पर केंद्रित हो गई है। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक की देखभाल सामूहिक जिम्मेदारी है।

डॉ. टंडन ने कहा, ‘‘हमें तंत्रिका विज्ञान को स्ट्रोक से मस्तिष्क की कार्यक्षमता की क्षति के बजाय संरक्षित मस्तिष्क की कार्यक्षमता से सीखने का लक्ष्य रखना चाहिए।’’

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अपर सचिव और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) की मिशन निदेशक आराधना पटनायक ने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों सहित एनएचएम की पहल के माध्यम से रोकथाम, शुरुआती पहचान, समय पर मरीजों को आगे भेजने और समन्वित देखभाल पर जोर दिया।

उन्होंने स्ट्रोक के जोखिम वाले कारकों की जांच तथा आशा, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों और चिकित्सा अधिकारियों के लिए व्यवस्थित प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई।

नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम श्रीनिवास ने रोकथाम, शुरुआती पहचान, आपात उपचार, पुनर्वास और सामुदायिक जागरूकता को शामिल करते हुए देखभाल की समग्र व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया।

श्रीनिवास ने 12 आकांक्षी जिलों में चल रही मस्तिष्क स्वास्थ्य पहल का उल्लेख किया और स्ट्रोक की देखभाल में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता बताई।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्कूली छात्र स्ट्रोक के प्रति जागरुकता फैलाने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।

भाषा रवि कांत रवि कांत अविनाश

अविनाश


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