सीबीआई की जांच के 7200 से अधिक मामले सुनवाई के लिए लंबित
सीबीआई की जांच के 7200 से अधिक मामले सुनवाई के लिए लंबित
नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने अपनी एक नवीनतम रिपोर्ट में कहा है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच से गुजरे भ्रष्टाचार के 7,200 से ज्यादा मामले अदालतों में सुनवाई के लिए लंबित हैं तथा उनमें से 409 मामले तो दो दशक से भी अधिक पुराने हैं।
इस सीवीसी रिपोर्ट में कहा गया है कि 31 दिसंबर, 2025 तक अदालतों में सुनवाई के लिए लंबित कुल 7,229 मामलों में से, 1,612 मामले तीन साल से कम समय से, 860 मामले तीन से पांच साल तक की अवधि से तथा 1,901 मामले पांच से 10 साल की अवधि से सुनवाई के लिए लंबित हैं।
सीवीसी की वार्षिक रिपोर्ट, 2025 के अनुसार भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के 2,447 मामले 10 से 20 साल तक अवधि से और 409 मामले 20 साल से ज़्यादा समय से सुनवाई के लिए लंबित हैं।
आयोग का कहना है कि उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में लगभग 14,083 अपील और पुनरीक्षण याचिकाएं (जिनमें रिट याचिकाएं भी शामिल हैं) लंबित हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, कुल मामलों में से 739 मामले 20 साल से ज़्यादा समय से, 1,347 मामले 15 से 20 साल तक की अवधि से तथा 3,161 मामले 10 से 15 साल तक की अवधि से लंबित हैं।
हाल में जारी की गयी रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी कुल 3,854 अपीलें और पुनरीक्षण याचिकाएं पांच-10 साल तक की अवधि से लंबित हैं, 1,987 मामले दो पांच से साल तक की अवधि से और 2,995 मामले दो साल से कम समय से लंबित हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि सीबीआई के पास भ्रष्टाचार के 473 मामलों की जांच लंबित हैं। उनमें से 39 मामले पांच साल से ज़्यादा समय से, 37 मामले तीन से पांच साल तक की अवधि से और 33 मामले दो से तीन साल तक की अवधि से लंबित हैं।
इकतीस दिसंबर, 2025 तक, 72 मामले एक से दो साल तक अवधि से और 292 मामले एक साल से कम समय से जांच के लिए लंबित हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘सीबीआई से उम्मीद की जाती है कि वह मामला दर्ज होने के एक साल के अंदर जांच पूरी कर ले। जांच पूरी होने का मतलब है कि जहां जरूरी हो, वहां सक्षम अधिकारी से मंज़ूरी मिलने के बाद (अगर मंजूरी की जरूरत हो) अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया जाए।’’
हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ मामलों में जांच पूरी होने में देरी नजर आयी है। इनमें अनुरोध पत्र के जवाब मिलने में देरी’ और ‘बेहिसाब संपत्ति के मामलों में दस्तावेज़ों/‘टाइटल डीड्’ वगैरह की जांच-पड़ताल में लगने वाला समय’ जैसी बातें शामिल हैं।
भाषा राजकुमार मनीषा
मनीषा

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