वर्ष 2025 में अल्पसंख्यकों से जुड़ी अधिकतर घटनाएं गैर सांप्रदायिक प्रकृति की थीं: बांग्लादेश

वर्ष 2025 में अल्पसंख्यकों से जुड़ी अधिकतर घटनाएं गैर सांप्रदायिक प्रकृति की थीं: बांग्लादेश

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  • Publish Date - January 19, 2026 / 04:03 PM IST,
    Updated On - January 19, 2026 / 04:03 PM IST

नयी दिल्ली/ढाका, 19 जनवरी (भाषा) बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने सोमवार को कहा कि 2025 के दौरान देश में अल्पसंख्यक समुदायों के सदस्यों से जुड़ी अधिकतर घटनाएं ‘आपराधिक प्रकृति’ की थीं और उनका सांप्रदायिक उद्देश्यों से कोई लेना-देना नहीं था।

मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की प्रेस शाखा ने यह बयान ऐसे समय में जारी किया है, जब कुछ दिन पहले नौ जनवरी को भारत ने बांग्लादेश पर वहां अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों से ‘तेजी से और दृढ़ता से’ निपटने का दबाव डाला था और इन घटनाओं को बाहरी कारणों से जोड़ने के प्रयासों को ‘चिंताजनक’ बताया था।

भारत ने यह प्रतिक्रिया पिछले कुछ सप्ताहों में बांग्लादेश में कई हिंदुओं की हत्या की घटनाओं की पृष्ठभूमि में दी थी।

अंतरिम सरकार ने एक वर्ष के आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि 2025 में जनवरी से दिसंबर के बीच बांग्लादेश भर में अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़ी कुल 645 घटनाएं दर्ज की गईं।

उसने कहा, “हालांकि हर घटना चिंता का विषय है, लेकिन आंकड़े एक स्पष्ट और साक्ष्य-आधारित तस्वीर पेश करते हैं कि अधिकतर मामले सांप्रदायिक नहीं, बल्कि आपराधिक प्रकृति के थे।”

मुख्य सलाहकार के सत्यापित सोशल मीडिया खाते से पोस्ट किए गए बयान के अनुसार, 645 घटनाओं में से 71 में सांप्रदायिक तत्वों की संलिप्ता पाई गई। इनमें मंदिरों में तोड़फोड़ के 38 मामले, आगजनी के आठ मामले, चोरी का एक मामला, हत्या का एक मामला और मूर्तियों को तोड़ने की धमकी, भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट तथा पूजा स्थलों को नुकसान पहुंचाने जैसी 23 अन्य घटनाएं शामिल है।

बयान में कहा गया कि इन 71 घटनाओं में से 50 मामलों में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की और इतनी ही गिरफ्तारियां की गईं, जबकि 21 मामलों में एहतियाती या जांच संबंधी कदम उठाए गए।

शेष 574 घटनाएं सामाजिक विवादों से जुड़ी थीं, जिनमें पड़ोसियों के बीच विवाद (51), भूमि से संबंधित संघर्ष (23), चोरी (106), व्यक्तिगत दुश्मनी (26), बलात्कार (58) और अप्राकृतिक मौत के 172 मामले शामिल हैं।

अंतरिम सरकार ने कहा कि यह रिपोर्ट “चुनौतियों से इनकार नहीं करती और न ही पूर्णता का दावा करती है, बल्कि व्यापक राष्ट्रीय संदर्भ में अल्पसंख्यक समुदायों को प्रभावित करने वाले अपराध के रुझानों की एक तथ्यात्मक, साक्ष्य-आधारित तस्वीर प्रस्तुत करने का प्रयास करती है।”

उसने कहा, “हालांकि सभी अपराध गंभीर हैं और उनके लिए जवाबदेही जरूरी है, लेकिन आंकड़े दिखाते हैं कि अल्पसंख्यक पीड़ितों से जुड़ी अधिकांश घटनाएं सांप्रदायिक शत्रुता से नहीं, बल्कि व्यापक आपराधिक और सामाजिक कारकों से प्रेरित थीं।”

इस महीने की शुरुआत में ‘बांग्लादेश हिंदू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल’ (बीएचबीसीयूसी) ने आरोप लगाया था कि जैसे-जैसे आम चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, देश में सांप्रदायिक हिंसा खतरनाक दर से बढ़ रही है।

बांग्लादेश में संसदीय चुनाव 12 फरवरी को होने हैं। काउंसिल ने कहा था कि उसने अकेले दिसंबर 2025 में सांप्रदायिक हिंसा की 51 घटनाएं दर्ज की हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नौ जनवरी को कहा था, “हम लगातार चरमपंथियों द्वारा अल्पसंख्यकों तथा उनके घरों व व्यवसायों पर किए जा रहे हमलों का चिंताजनक सिलसिला देख रहे हैं।”

उन्होंने कहा था कि ऐसी घटनाओं से तुरंत और सख्ती से निपटना जरूरी है। जायसवाल ने यह भी कहा था कि इन घटनाओं को व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता, राजनीतिक मतभेदों या बाहरी कारणों से जोड़ने की एक चिंताजनक प्रवृत्ति देखी जा रही है।

अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के सत्ता से बेदखल होने के उपरांत यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता संभालने के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंधों में तनाव आया है। भारत बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर लगातार चिंता जताता रहा है।

भाषा राजकुमार खारी

खारी