उत्तराखंड के 108 सीमावर्ती गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकार-आईटीबीपी के बीच एमओयू

उत्तराखंड के 108 सीमावर्ती गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकार-आईटीबीपी के बीच एमओयू

उत्तराखंड के 108 सीमावर्ती गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकार-आईटीबीपी के बीच एमओयू
Modified Date: January 15, 2026 / 09:13 pm IST
Published Date: January 15, 2026 9:13 pm IST

देहरादून, 15 जनवरी (भाषा) उत्तराखंड के 108 सीमावर्ती गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए बृहस्पतिवार को उत्तराखंड सरकार और भारत–तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में ‘स्वस्थ सीमा अभियान’ के प्रथम चरण के तहत किए गए इस एमओयू का उद्देश्य पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जिलों के 108 सीमावर्ती गांवों में निवासरत आबादी को एकीकृत प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।

मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा भी मौजूद रहे।

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समझौते के तहत आईटीबीपी योग्य चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ, चिकित्सा जांच कक्ष तथा टेली-मेडिसिन सुविधाओं की व्यवस्था करेगी और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सीमावर्ती गांवों का नियमित भ्रमण कर स्थानीय नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगी।

इसके अलावा, आईटीबीपी लाभार्थियों के ‘मेडिकल हेल्थ कार्ड’ सहित अन्य रिकॉर्ड का रख-रखाव करेगी तथा उपकरणों, दवाइयों और उपभोग्य सामग्रियों का समुचित प्रबंधन सुनिश्चित करेगी।

वहीं, उत्तराखंड सरकार संबंधित गांवों के जनसांख्यिकीय आंकड़े उपलब्ध कराएगी और प्रारंभिक स्तर पर आवश्यक चिकित्सा उपकरण प्रदान करेगी। उपभोग के आधार पर राज्य सरकार प्रत्येक छह माह में दवाइयों और अन्य सामग्रियों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। साथ ही, आपातकालीन परिस्थितियों में निकासी, दूरसंचार सहायता, उपकरणों का स्वामित्व और आवश्यक प्रतिस्थापन की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार निभाएगी।

मुख्यमंत्री ने ‘स्वस्थ सीमा अभियान’ को सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने की दिशा में एक प्रभावी पहल बताते हुए कहा कि यह अभियान न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करेगा, बल्कि इन गांवों में विश्वास, सुरक्षा और स्थायित्व को भी बढ़ावा देगा।

धामी ने कहा कि सरकार सीमांत क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और यह एमओयू उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भाषा दीप्ति खारी

खारी


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