चिकित्सकों ने मुंबई की दृष्टिहीन स्त्रीरोग विशेषज्ञ की नेत्र ज्योति लौटाई, दुनिया की पहली ऐसी सर्जरी
चिकित्सकों ने मुंबई की दृष्टिहीन स्त्रीरोग विशेषज्ञ की नेत्र ज्योति लौटाई, दुनिया की पहली ऐसी सर्जरी
चेन्नई, 18 फरवरी (भाषा) डॉ. अग्रवाल्स आई हॉस्पिटल के नेत्र रोग विशेषज्ञों ने ‘दुनिया की पहली ऐसी सर्जरी’ करके मुंबई की 44 साल की एक स्त्रीरोग विशेषज्ञ की आंखों की रोशनी लौटाई। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अस्पताल की एक विज्ञप्ति के अनुसार दोनों आंखों से दृष्टिहीन मरीज को एक ही सर्जरी के तुरंत बाद अपनी बाईं आंख में रोशनी वापस मिल गई। इस प्रक्रिया में एडवांस्ड 5एफ-आईएचएचएफ इंट्राऑक्युलर लेंस इम्प्लांटेशन तकनीक के साथ ऑप्टिकल पेनेट्रेटिंग केराटोप्लास्टी और स्ट्रक्चरल रिकंस्ट्रक्शन का इस्तेमाल किया गया था।
ऑप्टिकल पेनेट्रेटिंग केराटोप्लास्टी एक पूरी मोटाई का कॉर्नियल प्रतिरोपण है जिसमें नजर वापस लाने के लिए खराब कॉर्निया को स्वस्थ ऊतकों से बदला जाता है।
गंभीर ग्लूकोमा और कई नेत्र संबंधी समस्याओं की वजह से मरीज की 10 साल से लगातार आंखों की रोशनी कम हो रही थी।
इससे पहले कई सर्जरी करवाने के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ था।
सर्जरी करने वाले डॉ. अग्रवाल्स आई अस्पताल के डॉ. सूसन जैकब ने कहा कि नजर जाने का सीधा कारण बाईं आंख में गलत जगह पर लगा आर्टिफिशियल लेंस था।
उन्होंने कहा कि खराब लेंस आइरिस और कॉर्निया पर दबाव डाल रहा था, जिससे आंख की आगे की परतें आपस में जुड़ रही थीं।
डॉ. जैकब द्वारा विकसित 5एफ-आईएसएचएफ तकनीक में नए इंट्राऑक्युलर लेंस को आंख में सही स्थान पर बिना टांके या बड़े चीरे के लगाया जाता है।
चीफ क्लिनिकल ऑफिसर डॉ. अश्विन अग्रवाल ने कहा कि मामले की जटिलता को देखते हुए एक टिकाऊ, लंबे समय तक चलने वाला समाधान देने के लिए खराब आंखों की बनावट को बड़े पैमाने पर फिर से सही करने की ज़रूरत थी। भाषा वैभव पवनेश
पवनेश

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