वाईएसआरसीपी विधानपरिषद सदस्य के खिलाफ हत्या के मामले की सुनवाई 30 नवंबर तक पूरी करने का निेर्देश
वाईएसआरसीपी विधानपरिषद सदस्य के खिलाफ हत्या के मामले की सुनवाई 30 नवंबर तक पूरी करने का निेर्देश
नयी दिल्ली, 20 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सत्तारूढ़ नेताओं की आंध्र प्रदेश पुलिस के साथ ‘‘पूर्ण रूप से सांठगांठ होने’’ का उल्लेख करते हुए शुक्रवार को आदेश दिया कि हत्या के मामले में युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के विधानपरिषद सदस्य अनंत सत्य उदय भास्कर राव के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई 30 नवंबर तक पूरी की जाए।
तत्कालीन सत्तारूढ़ वाईएसआरसीपी के विधानपरिषद सदस्य (एमएलसी) राव पर मई 2022 में आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में पैसों को लेकर हुए विवाद में अपने पूर्व ड्राइवर वीधी सुब्रमण्यम की हत्या का आरोप है। राव को मामले में गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया था।
जांच और मुकदमे की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई निर्देश जारी करते हुए, प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपनी कड़ी टिप्पणी में कहा, ‘‘यह पूर्णतः मिलीभगत और सांठगांठ का मामला है। यह नेताओं और पुलिस के बीच सांठगांठ का स्पष्ट उदाहरण है।’’
पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली भी शामिल हैं।
आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने हत्या के मामले में राव की जमानत याचिका 26 सितंबर 2022 को खारिज कर दी थी। उच्च न्यायालय ने कहा था कि किसी आरोपपत्र को केवल इसलिए ‘‘अधूरा’’ या ‘‘दोषपूर्ण’’ नहीं कहा जा सकता कि उसे तकनीकी सुधारों की कमी के कारण अदालत द्वारा वापस भेज दिया गया था।
उच्चतम न्यायालय ने 12 दिसंबर 2022 को राव को अंतरिम जमानत देते हुए कहा था कि आरोपी को हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
शुक्रवार को प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले के रिकॉर्ड का अवलोकन किया और कहा कि यह स्पष्ट है कि राज्य पुलिस आरोपी के साथ मिली हुई थी, फिर भी उसे उच्च न्यायालय से जमानत नहीं मिली।
पीठ ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मामले की सुनवाई किसी वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी को सौंपने को कहा, ताकि सप्ताह में कम से कम एक बार मामले की सुनवाई हो सके।
पीठ ने राज्य पुलिस को 31 मार्च तक मामले की जांच पूरी करने का निर्देश देते हुए निचली अदालत को विधानपरिषद सदस्य के खिलाफ आरोप तय करने से संबंधित मामलों को 18 अप्रैल 2026 तक निपटाने को कहा।
पीठ ने अभियोजन पक्ष को मामले में अपने गवाहों से पूछताछ पूरी करने के लिए 31 अगस्त तक का समय दिया।
आरोपी को अपने बचाव में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए दो महीने का समय देते हुए, पीठ ने निचली अदालत को 30 नवंबर तक सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया।
पीठ ने उच्च न्यायालय सहित सभी अदालतों को ऐसा कोई भी आदेश पारित करने से रोक दिया, जिससे सुनवाई अटक सकती हो।
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश

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