मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ‘संविधान और शरीयत बचाने’ के लिए आंदोलन की घोषणा की

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ‘संविधान और शरीयत बचाने’ के लिए आंदोलन की घोषणा की

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने ‘संविधान और शरीयत बचाने’ के लिए आंदोलन की घोषणा की
Modified Date: August 31, 2026 / 07:56 pm IST
Published Date: August 31, 2026 7:56 pm IST

नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता, न्याय और समानता के संरक्षण के लिए देशव्यापी जन आंदोलन शुरू करने की घोषणा की, जिसमें समाज के सभी न्यायप्रिय एवं लोकतांत्रिक लोगों को शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।

बोर्ड ने एक बयान में कहा कि वह धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, वकीलों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के सहयोग से ‘‘संविधान और शरीयत के संरक्षण के लिए आंदोलन’’ की शुरुआत कर रहा है।

आंदोलन का संचालन एक ‘मजलिस-ए-अमल’ (कार्य समिति) के माध्यम से किया जाएगा।

बोर्ड ने कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, जीवन और संपत्ति की सुरक्षा, गरिमा एवं सम्मान तथा कानून के समान रूप से क्रियान्वयन की गारंटी देता है।

उसने दावा किया, ‘‘पिछले कई वर्षों में देश में ऐसी परिस्थितियां पैदा हुई हैं जिनमें कमजोर और हाशिये के वर्गों, विशेष रूप से मुसलमानों को धार्मिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्तरों पर दबाव, असुरक्षा और भेदभाव का सामना करना पड़ा है।’’

बयान में ‘मॉब लिंचिंग’, ‘‘गैरकानूनी’’ बुलडोजर कार्रवाई, मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को निशाना बनाए जाने, वक्फ संपत्तियों और कब्रिस्तानों पर कथित अवैध कब्जे तथा मुस्लिम युवाओं को ‘‘बेबुनियाद’’ मामलों में मनमाने ढंग से गिरफ्तार किए जाने जैसे मुद्दे उठाए गए हैं।

बोर्ड ने आरोप लगाया कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के माध्यम से मुस्लिम पर्सनल लॉ को कमजोर करने के कथित प्रयासों, वंदे मातरम का गायन अनिवार्य किए जाने से अल्पसंख्यकों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा रही है तथा शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम में हस्तक्षेप किया जा रहा है।

उसने कहा कि इन घटनाओं ने आबादी के एक बड़े हिस्से में असुरक्षा की भावना को गहरा किया है और संविधान, कानून के शासन, सामाजिक सद्भाव तथा राष्ट्रीय एकता के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा की हैं।

बोर्ड ने कहा, ‘‘यह केवल मुसलमानों का मुद्दा नहीं है, बल्कि भारत की संवैधानिक पहचान, लोकतांत्रिक मूल्यों और साझा राष्ट्रीय विरासत से जुड़ा विषय है।’’

उसके मुताबिक, आंदोलन के जरिए नफरत, सांप्रदायिकता और हिंसा के खिलाफ शांति, भाईचारे, प्रेम और आपसी सम्मान का संदेश दिया जाएगा। अन्याय और उत्पीड़न के पीड़ितों को कानूनी, सामाजिक और सार्वजनिक समर्थन उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

बोर्ड ने कहा, ‘‘आंदोलन के तहत मुसलमानों के जीवन और संपत्ति, उनकी धार्मिक स्वतंत्रता और पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की जाएगी। यूसीसी लागू करने और वंदे मातरम का गायन अनिवार्य किए जाने के खिलाफ भी जनमत तैयार किया जाएगा।’’

उसने ‘‘भीड़ द्वारा हत्या’’ (मॉब लिंचिंग) के मुद्दे पर एक व्यापक दस्तावेज जारी करने की घोषणा की है।

उसका कहना है कि इसमें कानून का शासन, राज्य एवं प्रशासन की जिम्मेदारियां, पीड़ितों के कानूनी अधिकार तथा जीवन और संपत्ति की सुरक्षा के अधिकार को रेखांकित किया जाएगा।

बोर्ड के अनुसार, संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा, घृणा अपराधों पर रोक, धार्मिक स्वतंत्रता, अवैध ध्वस्तीकरण की रोकथाम, वक्फ संपत्तियों और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा तथा कानून के समान अनुप्रयोग से संबंधित मांगों वाला एक ‘मांगपत्र’ राष्ट्रपति को सौंपा जाएगा। इसे राज्यों में राज्यपालों और प्रत्येक जिले में जिला प्रशासन के माध्यम से भेजा जाएगा।

भाषा हक हक अविनाश

अविनाश


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