शबरिमला सोना गायब होने के मामले में मेरी गिरफ्तारी बदले की भावना से प्रेरित

शबरिमला सोना गायब होने के मामले में मेरी गिरफ्तारी बदले की भावना से प्रेरित

शबरिमला सोना गायब होने के मामले में मेरी गिरफ्तारी बदले की भावना से प्रेरित
Modified Date: February 20, 2026 / 03:23 pm IST
Published Date: February 20, 2026 3:23 pm IST

कोल्लम (केरल), 20 फरवरी (भाषा) शबरिमला में सोना गायब होने के मामले में गिरफ्तार तंत्री कंदारारू राजीवरु ने अपनी गिरफ्तारी को 2018 में शबरिमला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश संबंधी विवाद के समय के अपने रुख से जोड़ते हुए दावा किया है कि उस समय उनके रुख ने कई लोगों को नाराज कर दिया था।

द्वारपालक (संरक्षक देवता) की मूर्ति से कथित रूप से सोना गायब होने के मामले में 16वें आरोपी और श्रीकोविल (गर्भगृह) के दरवाजों से कथित रूप से सोना चोरी के मामले में 13वें आरोपी राजीव को हाल में कोल्लम सतर्कता न्यायालय ने जमानत दे दी।

जमानत आदेश में सुनवाई के दौरान मुख्य पुजारी के वकील की दलीलों का उल्लेख किया गया, जिसमें 2018 के शबरिमला विवाद का जिक्र भी शामिल है, जब सरकार ने उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद रजस्वला आयु सीमा की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी।

तंत्री ने तर्क दिया कि उस दौरान जब एक निश्चित आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश का प्रयास किया जा रहा था तब अनुष्ठान करते समय उन्होंने मंदिर के रीति-रिवाजों और परंपराओं को बनाए रखने के लिए सख्त रुख अपनाया था तथा इस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने स्थापित प्रथाओं से छेड़छाड़ करने के प्रयासों की स्थिति में पूजा और धार्मिक समारोह आयोजित नहीं करने की धमकी भी दी थी।

उन्होंने तर्क दिया कि जब शबरिमला को हर दिन खुला रखने के प्रयास किए गए थे, तो उन्होंने मूर्ति के ‘‘नित्य ब्रह्मचारी’’ स्वरूप का हवाला देते हुए आपत्ति जताई थी।

राजीवरु ने कहा कि त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड की नियमावली के अनुसार, मंदिर में पुजारी की भूमिका केवल अनुष्ठान करना है और उन्होंने देवता की पवित्रता के लिए सभी कर्तव्यों का पालन किया है।

उन्होंने तर्क दिया, ‘‘मूर्ति पूजा के क्षेत्र में तंत्री आध्यात्मिक मार्गदर्शक होता है। शास्त्रों के अनुसार, पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के उचित संचालन के लिए तंत्री जिम्मेदार होता है।’’

उन्होंने दावा किया कि कलाकृतियों से सोने का कथित गबन त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड के अधिकारियों द्वारा कुछ बाहरी लोगों की मिलीभगत से किया गया था और उनके खिलाफ आरोप निराधार है।

उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) जानबूझकर मामले को भटका रहा है और उन्हें मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी से जोड़ रहा है।

दूसरी ओर, एसआईटी ने यह दलील दी कि मंदिर का प्रबंधन टीडीबी करता है, लेकिन प्रथागत रीति-रिवाजों, अनुष्ठानों और धार्मिक समारोहों से संबंधित मामलों में तंत्री को ही अंतिम अधिकार प्राप्त है।

दो मामलों में राजीवरु को जमानत देते हुए अदालत ने कहा कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है।

इस बीच, केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने कोच्चि में पत्रकारों से कहा कि सतर्कता न्यायालय द्वारा राजीवरु के पक्ष में दिया गया जमानत आदेश महत्वपूर्ण है और विशेष जांच दल (एसआईटी) को उनकी गिरफ्तारी के कारणों को स्पष्ट करना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘एसआईटी को यह जवाब देना चाहिए कि तंत्री को बिना किसी उचित कारण के 41 दिनों तक जेल में क्यों रखा गया।’’

भाषा सुरभि मनीषा

मनीषा


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