तेलंगाना में एक-तिहाई मतदाताओं के नाम हटाए गए, तत्काल कदम उठाएं सीईसी: कांग्रेस

तेलंगाना में एक-तिहाई मतदाताओं के नाम हटाए गए, तत्काल कदम उठाएं सीईसी: कांग्रेस

तेलंगाना में एक-तिहाई मतदाताओं के नाम हटाए गए, तत्काल कदम उठाएं सीईसी: कांग्रेस
Modified Date: August 29, 2026 / 09:08 pm IST
Published Date: August 29, 2026 9:08 pm IST

नयी दिल्ली, 29 अगस्त (भाषा) कांग्रेस ने शनिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से आग्रह किया कि तेलंगाना में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाताओं के नाम ‘‘बड़े पैमाने पर हटाए जाने’’ को लेकर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा जताई गई चिंताओं के समाधान के लिए तत्काल कदम उठाएं।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने नाम हटाए जाने को ‘‘हैरान करने वाला और पूरी तरह अस्वीकार्य’’ कदम बताया और उम्मीद जताई कि ज्ञानेश कुमार मुख्यमंत्री रेड्डी द्वारा उठाई गई चिंताओं पर शीघ्र कार्रवाई करेंगे।

रमेश ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री द्वारा कुमार को लिखे पत्र को ‘एक्स’ पर साझा किया।

पत्र में रेड्डी ने दावा किया कि राज्य में एसआईआर के दौरान करीब एक-तिहाई मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए कई सुझाव भी दिए कि कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘‘तेलंगाना के मुख्यमंत्री ने अभी सीईसी को एसआईआर प्रक्रिया में नाम हटाए जाने के हैरान करने वाले और पूरी तरह अस्वीकार्य पैमाने को लेकर पत्र लिखा है। हम उम्मीद करते हैं कि कुमार मुख्यमंत्री द्वारा उठाई गई वास्तविक चिंताओं पर तुरंत कार्रवाई करेंगे।’’

अपने पत्र में रेड्डी ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया अब ऐसे चरण में पहुंच गई है जहां आंकड़ों पर खुद निर्वाचन आयोग का ध्यान जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘10 जून 2026 को 3.38 करोड़ मतदाताओं वाली सूची के मुकाबले करीब 73.39 लाख प्रविष्टियों (21.7 प्रतिशत) को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहराव वाली श्रेणियों में रखा गया है। अब तक डिजिटल स्वरूप में अपलोड किए गए 2.65 करोड़ गणना प्रपत्रों में से 60.50 लाख में विसंगतियां चिह्नित की गई हैं और 32.36 लाख में पिछली मतदाता सूची से जुड़ाव नहीं पाया गया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘दोनों श्रेणियां अलग-अलग हैं… इनकी कुल संख्या 92.86 लाख है और इनमें से प्रत्येक मतदाता को नोटिस दिया जाना है। सीधे शब्दों में कहें तो राज्य के करीब एक-तिहाई मतदाताओं को अब या तो अपनी पात्रता नए सिरे से साबित करनी होगी या अंतिम मतदाता सूची में अपना स्थान गंवाना होगा।’’

रेड्डी ने कहा कि अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहराव वाली (एएसडीडी) सूची का स्वरूप गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने दावा किया कि 73.39 लाख चिह्नित प्रविष्टियों में से 45.19 लाख (करीब 62 प्रतिशत) को ‘‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

मुख्यमंत्री ने मौजूदा सत्यापन पद्धति में गंभीर संरचनात्मक खामियों का भी दावा किया। उन्होंने कहा कि इसमें अस्थायी अनुपस्थिति और स्थायी स्थानांतरण के बीच कोई अंतर नहीं किया गया है तथा वास्तविक रूप से स्थानांतरित हुए मतदाताओं के लिए भी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है।

उन्होंने दावा किया कि इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में पात्र नागरिकों को व्यवस्थित रूप से अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं मिल रहा है और संभव है कि उन्हें मतदान के दिन मतदान केंद्र पर पहुंचने के बाद ही अपने मताधिकार से वंचित होने का पता चले।

रेड्डी ने विसंगतियों को दूर करने के लिए कई सुझाव भी दिए। इनमें दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अवधि बढ़ाना, मतदाता को नोटिस का जवाब देने के लिए उचित समय देना, सहायता केंद्र स्थापित करना, ऐसे दस्तावेजों की सूची तय करना जिन्हें मतदाता वास्तव में प्राप्त कर सके शामिल हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा, ‘‘पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एक भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र मतदाता शामिल न हो। प्रक्रिया का परिणाम ऐसा होना चाहिए जिससे मतदाताओं में विश्वास पैदा हो और किसी भी पात्र व्यक्ति को अपनी पात्रता साबित करने के लिए पर्याप्त समय या अवसर के अभाव में सूची से बाहर न किया जाए।’’

उन्होंने कहा कि तेलंगाना सरकार निर्वाचन आयोग को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। इसमें सहायता केंद्र खोलना तथा ग्राम सभाओं और वार्ड समिति की बैठकों के आयोजन के लिए प्रशासन को सक्रिय करना शामिल है।

भाषा हक माधव अविनाश

अविनाश


लेखक के बारे में