चंडीगढ़, एक सितंबर (भाषा) ‘नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी एसोसिएशन’ (एनएपीए) ने मंगलवार को अमेरिका की आव्रजन अदालत के उन आंकड़ों पर चिंता जताई, जिनके मुताबिक, जून 2026 में शरण के 94.1 प्रतिशत मामलों को खारिज कर दिया गया और केवल 5.5 प्रतिशत मामलों को ही मंजूरी मिली।
एनएपीए के कार्यकारी निदेशक सतनाम सिंह चहल ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मामलों का खारिज होना अमेरिकी शरण प्रणाली की निष्पक्षता को लेकर चिंता पैदा करता है।
कार्यकारी निदेशक ने कहा, ‘हम अमेरिकी आव्रजन संबंधी कानूनों का समर्थन करते हैं और धोखाधड़ी के आधार पर किए जाने वाले शरण के दावों का कड़ा विरोध करते हैं। हालांकि, वास्तविक शरणार्थियों को अपना मामले और सबूत पेश करने के लिए निष्पक्ष अवसर मिलना ही चाहिए।’
यह आंकड़े ‘ट्रांजैक्शनल रिकॉर्ड्स एक्सेस क्लियरिंगहाउस’ (टीआरएसी) द्वारा जारी किए गए हैं।
चहल ने कहा कि शरण के मामलों में 94 प्रतिशत से अधिक की अस्वीकृति दर बहुत अधिक है और इसकी एक स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
टीआरएसी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025 और 2026 के दौरान 279 आव्रजन न्यायाधीशों ने या तो इस्तीफा दे दिया या फिर उन्हें हटा दिया गया। इसके साथ ही, सैकड़ों नये और अस्थायी न्यायाधीश भी आव्रजन अदालत प्रणाली में शामिल हुए हैं।
चहल ने कहा कि आव्रजन से संबंधित लंबित मामलों को कम करना महत्वपूर्ण है, लेकिन न्याय का आकलन केवल इस बात से नहीं किया जाना चाहिए कि मामलों का निपटारा कितनी जल्दी हुआ है।
उन्होंने कहा, ‘प्रत्येक वास्तविक शरणार्थी उचित सुनवाई, सबूत पेश करने के लिए पर्याप्त समय और सक्षम कानूनी सहायता पाने का हकदार है।’
एनएपीए ने अमेरिकी सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि भाषा से जुड़ी समस्याएं, दस्तावेजों की कमी और वित्तीय कठिनाइयां वास्तविक शरणार्थियों को अपना मामला पेश करने से न रोक सकें।
चहल ने कहा कि अमेरिका न्याय और मानव गरिमा के सिद्धांतों का पालन करते हुए भी अपने आव्रजन कानूनों को लागू कर सकता है।
उन्होंने कहा कि एनएपीए अमेरिकी आव्रजन प्रणाली में होने वाले बदलावों पर नजर बनाए रखेगा और पंजाबी, सिख तथा अन्य अप्रवासी समुदायों के अधिकारों व सुरक्षा के लिए आवाज उठाता रहेगा।
भाषा प्रचेता मनीषा
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