सर्पदंश से युवक की मौत, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस

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सर्पदंश से युवक की मौत, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस

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  • Publish Date - September 8, 2026 / 06:19 PM IST,
    Updated On - September 8, 2026 / 06:19 PM IST

नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश में सर्पदंश के कारण एक युवक की मौत हो जाने के बाद सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

आयोग ने यह कदम उप्र में चित्रकूट जिले के एक अस्पताल में मेडिकल लापरवाही और जीवन रक्षक आपातकालीन सुविधाओं की कमी के कारण सर्पदंश से एक युवक की मौत हो जाने की शिकायत के बाद उठाया है।

मामले की एक सितंबर की कार्यवाही के अनुसार, शिकायतकर्ता का आरोप है कि सर्पदंश के तुरंत बाद पीड़ित को जिले के स्वास्थ्य केंद्र ले जाने के बावजूद, उसे समय पर आपातकालीन उपचार नहीं मिला — जिसमें ‘एंटी-स्नेक वेनम’ (सर्प विषरोधी दवा) और वेंटिलेटर या गहन चिकित्सा कक्ष में भर्ती करना शामिल है। इसके बजाय उसे बिना आवश्यक आपातकालीन ट्रांजिट सहायता के प्रयागराज रेफर कर दिया गया, जिससे रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि शिकायतकर्ता का आरोप है कि मुख्य जिला अस्पताल में जीवन रक्षक जरूरी मेडिकल आपूर्ति का न होना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य और जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ‘‘उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के खंडेहा गांव में एक जहरीले सांप के काटने के बाद, जिला अस्पताल में गंभीर मेडिकल लापरवाही, इलाज में देरी और जीवन रक्षक आपातकालीन सुविधाओं की पूरी तरह कमी के कारण एक युवक की मौत हो गई।’’

शिकायतकर्ता ने आयोग से हस्तक्षेप करने की मांग की ताकि इसके लिए जिम्मेदार चिकित्सकों और अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच का आदेश दिया जा सके, राज्य सरकार को सभी जिला अस्पतालों में ‘‘एएसवी की अनिवार्य उपलब्धता’’ और आपातकालीन सहायता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जा सके, और पीड़ित के परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा दिलाया जा सके।

मानवाधिकार आयोग ने निर्देश दिया कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जाए और दो हफ्ते के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपी जाए।

आयोग ने कहा कि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया पीड़ित के मानवाधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होते हैं।

एनएचआरसी की एक पीठ ने, जिसके प्रमुख सदस्य प्रियंक कानूनगो हैं, मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत इस मामले का संज्ञान लिया है।

कार्यवाही में कहा गया, ‘‘रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वह सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी करे तथा उनसे दूर-दराज के इलाकों और सर्पदंश की अधिक घटनाओं वाले इलाकों में सर्प विषरोधी दवा की अनिवार्य उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाये गए विस्तृत कदमों के बारे में जानकारी देने को कहा जाए।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘राज्य के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे तुरंत ऐसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करें जिनका अभी तक कोई रिकॉर्ड नहीं है, सर्पदंश की घटनाओं से जुड़े आंकड़े एकत्र करें और बिना किसी देरी के सभी जरूरी स्वास्थ्य सेवा उपाय लागू करें। साथ ही, उन्हें शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करने और दो हफ्ते के अंदर कार्रवाई रिपोर्ट सौंपने का भी निर्देश दिया गया है।’’

भाषा सुभाष माधव

माधव