त्रिपुरा की राजनीति के खेल में टिपरा मोथा को लुभाने में जुटी राष्ट्रीय पार्टियां
त्रिपुरा की राजनीति के खेल में टिपरा मोथा को लुभाने में जुटी राष्ट्रीय पार्टियां
(जयंत भट्टाचार्य)
अगरतला, 22 जनवरी (भाषा) त्रिपुरा की राजनीतिक में तुरुप का इक्का समझी जा रही पार्टी टिपरा मोथा को लुभाने के लिए राष्ट्रीय पार्टियां एक-दूसरे के साथ होड़ कर रही हैं क्योंकि माना जा रहा है कि अगले महीने होने वाले विधानसभा चुनाव के बाद इस राज्य में कौन शासन करेगा, यह निर्धारित करने में आदिवासी पार्टी के वोट महत्वपूर्ण होंगे।
प्रद्योत किशोर माणिक्य देबबर्मा के नेतृत्व वाली पार्टी टिपरा मोथा का त्रिपुरा जनजातीय स्वायत्त जिला परिषद में शासन है और यह ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ की मांग कर रही है। टिपरा मोथा का कहना है कि वह किसी भी उस पार्टी या गठबंधन का समर्थन करेगी जो उसकी मांगों से सहमत होगा।
पार्टी ने पिछले साल अप्रैल में हुए त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) के चुनावों में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-आईपीएफटी गठबंधन के साथ सीधे मुकाबले में ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ की मांग पर 28 में से 18 सीटों पर जीत हासिल की थी।
विश्लेषकों का कहना है कि यह मांग 20 विधानसभा सीटों के परिणामों को प्रभावित करेगी, जहां 60 सदस्यीय सदन में आदिवासी चुनावी रूप से काफी प्रभावशाली हैं।
देबबर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी किसी भी राष्ट्रीय पार्टी के साथ गठबंधन करने को तैयार है जो त्रिपुरा के ‘मूल’ लोगों की मांग का संवैधानिक समाधान प्रदान करे।
यहां की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने अपनी ओर से इस सुदूर राज्य के विकास के लिए सभी पड़ावों को पार कर लिया है और परियोजनाएं शुरू कर दी हैं।
देबबर्मा ने कई मौकों पर संवाददाताओं से कहा है, ‘‘हम अपनी मांग का एक संवैधानिक समाधान चाहते हैं, जो केवल केंद्र सरकार प्रदान कर सकती है। केवल किसी वित्तीय पैकेज को मंजूरी देकर हमारी समस्या का समाधान संभव नहीं है।’’
पार्टी चाहती है कि केंद्र उसकी मांग पर चर्चा करे, लेकिन अभी तक उसे कोई जवाब नहीं मिला है। सत्तारूढ़ भाजपा, विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और कांग्रेस सहित राज्य के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने हालांकि कई मौकों पर इस मांग को खारिज कर दिया है और इसे ‘‘अलगाववादी और विभाजनकारी’’ बताया है।
देबबर्मा ने कहा, ‘‘कई बंगाली, आदिवासी परिषद क्षेत्र में रहते हैं। हम चाहते हैं कि वे शांति और सद्भाव से रहें। त्रिपुरा की रियासत में, बंगाली और आदिवासी शांति से रहते थे और हम उस परंपरा को बनाए रखना चाहते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर केंद्र हमारी मांग से सहमत नहीं है, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को हमें लिखित में एक वैकल्पिक समाधान देना चाहिए और हम अपने समुदाय के लोगों के साथ इस पर चर्चा करेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, केंद्र न तो हमारी मांग का जवाब दे रहा है और न ही हमें बातचीत के लिए आमंत्रित कर रहा है। वह हथियार उठाने वाले समूहों से बातचीत कर सकता है लेकिन हमारे साथ नहीं क्योंकि हम शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं।’’
भाषा देवेंद्र धीरज
धीरज

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