शारदीय नवरात्र में कैसे करें देवी को प्रसन्न

शारदीय नवरात्र में कैसे करें देवी को प्रसन्न

शारदीय नवरात्र में कैसे करें देवी को प्रसन्न
Modified Date: November 29, 2022 / 08:15 pm IST
Published Date: October 9, 2018 6:16 am IST

रायपुर। 10 अक्टूबर बुधवार को अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को शरद नवरात्रि महापर्व को पूरे देश में हर्ष उल्लास के साथ मनाया जायेगा। इस बार माता नाव पर सवार होकर आ रही हैं। इस शारदीय नवरात्र में चित्रा नक्षत्र, वैधृति योग के साथ घटस्थापना के योग बने थे। बुधवार से शुरू नवरात्र को कलश स्थापना पर माता नाव पर सवार होकर आ रही है ।

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 मान्यता है कि नाव पर सवार होकर आगमन समृधि का प्रतीक माना जाता है तथा किसान और आम जन के लिए हितकर है। माता को शक्ति का रूप माना गया है तथा जिनका प्रार्दुभाव राक्षसी वृत्ति के लोगों के वध के लिए हुआ। उस समय के असंगठित देवताओं ने संगठित तप कर माँ दुर्गा को अपनी-अपनी शक्तिया प्रदान कर माँ दुर्गा को महाशक्ति बनाया। असल में नवरात्रि का पर्व तप, त्याग, अनुशासन और शक्ति की उपासना का पर्व है।नवदुर्गा का प्रथम रूप शैलपुत्री-  मां शैलपुत्री शैल-पुत्री मतलब पर्वत की पुत्री। पर्वत भू-तत्वात्मक है। अर्थात स्थूल से उत्पन्न होने वाली गति। स्थूल शरीर रूपा, शक्ति के साथ धैर्यवती तथा परम सहनशील हैं। पवर्तराज की पुत्री के नाम से उनका नाम शैलपुत्री हुआ। नवरात्र के प्रथम दिवस पूजी जाने वाली माता की शक्तिया अनन्त हैं वृषभ स्थिता दाहिने हाथ में त्रिषूल और बायें हाथ में कमल पुष्प सुषोभित है, यहीं रूप नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा का है।

कलश स्थापन का मुहूर्त और विधि 

 

10 अक्टूबर को प्रातःकाल 07 बजकर 26 मिनट तक प्रतिपदा होने से पूरे दिन घटस्थापना के लिए शुभमानी जायेगी। घटस्थापना के चौधड़िया मुहूर्त में सर्वश्रेष्ठ मुर्हूत अभिजीत मुहूर्त 11:27 – 12:14 बजे तक, किन्तु 11:50 – 13:18 बजे तक राहुकाल, दिन 07:26 – 08:54 बजे तक यमघटाकाल, को छोड़कर शुभमूहुर्त दिन 10:22 -11:50 तक शुभ, दोपहर को 14:46 – 16:14 और 16:14-17:42 तक लाभ साथ ही सायं काल 19:14-20:46 तक शुभ योग में घटस्थापना करना चाहिए।सबसे पहले नारियल पर लाल कपडा लपेट कर मोली लपेट दें। अब नारियल को कलश पर रखें। अब कलश में सभी देवी देवताओं का आवाहन करें। ‘हे सभी देवी देवता और माँ दुर्गा आप सभी नौ दिनों के लिए इस में पधारें।’ अब दीपक जलाकर कलश का पूजन करें। धूपबत्ती कलश को दिखाएं। कलश को माला अर्पित करें। कलश को फल मिठाई अर्पित करें। कलश को इत्र समर्पित करें। 

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कलश स्थापना के बाद माँ दुर्गा की चौकी स्थापित की जाती है। नवरात्री के प्रथम दिन एक लकड़ी की चौकी की स्थापना करनी चाहिए। इसको गंगाजल से पवित्र करके इसके ऊपर सुन्दर लाल वस्त्र बिछाना चाहिए। इसको कलश के दायीं ओर रखना चाहिए। उसके बाद माँ भगवती की धातु की मूर्ति अथवा नवदुर्गा का फ्रेम किया हुआ फोटो स्थापित करना चाहिए। मूर्ति के अभाव में नवार्णमन्त्र युक्त यन्त्र को स्थापित करें। माँ दुर्गा को लाल चुनरी उड़ानी चाहिए। माँ दुर्गा से प्रार्थना करें ‘हे माँ दुर्गा आप नौ दिन के लिए इस चौकी में विराजिये।’ उसके बाद सबसे पहले माँ को दीपक दिखाइए। उसके बाद धूप, फूलमाला, इत्र समर्पित करें। फल, मिठाई अर्पित करें और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से सभी पाप एवं श्राप से मुक्ति मिलती है।

वेब डेस्क IBC24

 


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