एनसीपीआई ने बंगाल का सबसे बड़ा संसदीय गुट होने का दावा किया, पार्टी का कार्यालय हावड़ा में
एनसीपीआई ने बंगाल का सबसे बड़ा संसदीय गुट होने का दावा किया, पार्टी का कार्यालय हावड़ा में
कोलकाता, 15 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के शामिल होने के बाद राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आई नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) ने सोमवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में खुद के “पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा संसदीय गुट” होने का दावा किया।
त्रिपुरा में पंजीकृत, लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त एनसीपीआई का एक कार्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के संकराइल इलाके में होने की बात सामने आई है। इस संपत्ति का मालिकाना हक उत्तिया कुंडू और उनकी पत्नी शेवली के पास है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, उत्तिया और शेवली लगभग आठ साल पहले नदिया जिले से हावड़ा आकर बस गए थे।
एनसीपीआई ने पोस्ट किया, “बीस लोकसभा सीट के साथ एनसीपीआई पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ी संसदीय ताकत बनकर उभरी है और पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर राज्य की आवाज को आकार दे रही है।”
पार्टी ने कहा, “आंकड़े खुद सब बयां करते हैं। नेतृत्व, प्रतिनिधित्व और जनादेश ही पश्चिम बंगाल और भारत के भविष्य को तय करते हैं।”
एनसीपीआई ने अपने दावे के समर्थन में एक ग्राफिक भी पोस्ट किया, जिसमें दिखाया गया है कि पश्चिम बंगाल की कुल 42 लोकसभा सीट में से वर्तमान में 20 उसके, 12 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के, आठ तृणमूल कांग्रेस के और एक कांग्रेस के पास है।
एनसीपीआई ने तृणमूल के सभी 20 बागी सांसदों का अलग-अलग सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये स्वागत किया। उसने कहा कि इन सदस्यों का “लंबा राजनीतिक अनुभव, जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ाव और जनता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पार्टी को मजबूत और समृद्ध बनाएगी।”
हावड़ा के संकराइल इलाके में स्थित उस इमारत की दीवार पर ‘जागो बिस्व’ का भित्तिचित्र बना हुआ दिखाई दिया, जिसे एनसीपीआई ने बंगाल में अपना पंजीकृत कार्यालय बताया है। इमारत की एक दीवार पर ‘असंगठित महिला कामगार संघ’ लिखा भित्तिचित्र भी उकेरा हुआ था।
परिसर के मुख्य द्वार पर लगे साइनबोर्ड पर “उत्तिया कुंडू, बांग्ला अखबार के संपादक, गणित अध्यापक, ऑडिटर, स्वास्थ्य सलाहकार और योग साधक” लिखा हुआ था।
साइनबोर्ड पर शेवली कुंडू का नाम भी लिखा हुआ था और उनका परिचय “कलकत्ता उच्च न्यायालय की अधिवक्ता” के रूप में बताया गया था। कुंडू दंपति का दावा है कि उनके पास “भूमि सर्वेक्षण में डिप्लोमा” है। वहीं, शेवली ने खुद को “गणना अधिकारी” भी बताया है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि कुंडू दंपति इमारत में एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) का संचालन करते हैं, जो स्वयं-सहायता समूहों के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देता है।
एनसीपीआई ने पश्चिम बंगाल में 2023 में हुए पंचायत चुनावों में कुछ उम्मीदवार भी उतारे थे, लेकिन वे सभी हार गए थे।
इस बीच, एनसीपीआई के संस्थापक सदस्यों में से एक होने का दावा करने वाले शांतनू डे ने उत्तर 24 परगना जिले में संवाददाताओं से कहा कि वह इस घटनाक्रम (तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के शामिल होने) से खुश हैं।
डे के मुताबिक, वह एनसीपीआई के राष्ट्रीय सचिव भी हैं। उन्होंने कहा, “इससे हमारी पार्टी को आगे बढ़ने और देश के लिए काम करने में मदद मिलेगी। हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का समर्थन करते हैं और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक दल के तौर पर काम करना चाहते हैं। अगर काकोली घोष दस्तीदार मुझे बातचीत के लिए बुलाती हैं, तो मैं दिल्ली जाऊंगा और फिर हम साथ मिलकर मीडिया से बात कर सकते हैं।”
भाषा पारुल सुरेश
सुरेश

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