एनसीडब्ल्यू ने आईवीएफ क्लीनिकों के नियामक ढांचे की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की
एनसीडब्ल्यू ने आईवीएफ क्लीनिकों के नियामक ढांचे की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की
नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने कहा कि तेजी से विस्तार कर रहे प्रजनन उपचार क्षेत्र में अनियमितताओं को लेकर जताई गई चिंताओं के बीच उसने आईवीएफ क्लीनिकों, सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) केंद्रों और गैमीट (शुक्राणु एवं अंडाणु) बैंकों को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
एनसीडब्ल्यू ने बृहस्पतिवार को जारी एक बयान में कहा कि इस समिति की अध्यक्षता दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश आशा मेनन करेंगी। समिति में न्यायपालिका, चिकित्सा, फोरेंसिक विज्ञान, कानून प्रवर्तन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, लोक नीति तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के विशेषज्ञ शामिल हैं।
बयान में कहा गया, ‘तेजी से विस्तार कर रहे सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) क्षेत्र में अनियमितताओं को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने आईवीएफ क्लीनिकों, एआरटी केंद्रों और गैमीट (शुक्राणु एवं अंडाणु) बैंकों को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे तथा संबंधित कानूनों की व्यापक समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इसका उद्देश्य महिलाओं के प्रजनन अधिकारों का संरक्षण करना और उनकी गरिमा एवं सुरक्षा सुनिश्चित करना है।’
समिति में पूर्व आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी सुंदरी नंदा, राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की पूर्व सदस्य अर्चना मजूमदार, एनसीडब्ल्यू की सलाहकार समिति की सदस्य डॉ. शिप्रा धर और वरिष्ठ अधिवक्ता महालक्ष्मी पावनी शामिल हैं।
समिति के अन्य सदस्यों में सफदरजंग अस्पताल के डॉ. सर्वेश टंडन, एम्स की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नीता सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. नयना सहस्रबुद्धे, ‘फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज़ ऑफ इंडिया’ (एफओजीएसआई) के डॉ. रजनीकांत, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के एआरटी प्रभाग के एक नामित प्रतिनिधि तथा एनसीडब्ल्यू की वरिष्ठ समन्वयक कंचन खट्टर शामिल हैं।
भाषा तान्या सिम्मी
सिम्मी

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