शिमला, 13 जनवरी (भाषा) हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के अर्की बाजार में रविवार रात लगी भीषण आग के बाद से लापता छह नेपाली नागरिकों की तलाश के लिए जारी अभियान में मंगलवार को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और श्वान दस्ता भी शामिल हो गया। इन नागरिकों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
आग से वह चार मंजिला इमारत पूरी तरह नष्ट हो गई जिसमें ये प्रवासी परिवार रह रहे थे। आग से आसपास की इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है। इस अग्निकांड में अब तक आठ वर्षीय बच्चे सहित तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
अधिकारियों ने बताया कि बच्चे की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई, जबकि अन्य दो के जले हुए और क्षत-विक्षत अवशेष घटनास्थल से बरामद किए गए।
अधिकारियों ने बताया कि मलबे की भारी मात्रा के कारण तलाश अभियान में बाधा उत्पन्न हो रही है। उन्होंने बताया कि घटना के तुरंत बाद से ही जिला प्रशासन, पुलिस, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, होम गार्ड और अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर मौजूद हैं जबकि मंगलवार सुबह राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और श्वान दल को भी अभियान में सहायता के लिए शामिल किया गया।
अर्की के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) निशांत तोमर ने बताया कि लापता व्यक्तियों की पहचान की पुष्टि के लिए उनके परिवार के सदस्यों से डीएनए सैंपल लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब तक बरामद हुए अवशेषों की पहचान डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही संभव हो पाएगी।
राजीव गुप्ता के स्वामित्व वाली यह इमारत मिट्टी और लकड़ी से बनी थी और पूरी तरह जलकर खाक हो गई। भूतल और प्रथम तल पर व्यावसायिक दुकानें थीं, जबकि ऊपर की दो मंजिलें आवासीय उपयोग में थीं।
प्रत्यक्षदर्शियों ने छह से सात तेज धमाकों की आवाज सुनने की बात कही, जिनके सिलेंडर में विस्फोट होने की आशंका है। माना जा रहा है कि इन्होंने आग को भड़काने की भूमिका निभाई।
प्रशासन के अनुसार, तीनों मृतक और लापता छह व्यक्ति नेपाल के नागरिक हैं और नेपाल के करनाली प्रांत के सल्यान के निवासी हैं। नौ लोगों में से पांच नाबालिग हैं।
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 287 के तहत आग या ज्वलनशील पदार्थ के संबंध में लापरवाहीपूर्ण आचरण का मामला दर्ज किया है।
सोलन के उपायुक्त मनमोहन शर्मा ने आग लगने के कारणों की जांच के आदेश दिए हैं।
भाषा तान्या पवनेश
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