आईएनएस बाज रनवे के पूर्ण विस्तार को खारिज करने के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत : जयराम रमेश

आईएनएस बाज रनवे के पूर्ण विस्तार को खारिज करने के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत : जयराम रमेश

आईएनएस बाज रनवे के पूर्ण विस्तार को खारिज करने के फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत : जयराम रमेश
Modified Date: June 12, 2026 / 10:59 am IST
Published Date: June 12, 2026 10:59 am IST

नयी दिल्ली, 12 जून (भाषा) कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के संबंध में पत्र लिखा और आईएनएस बाज रनवे के पूर्ण विस्तार को खारिज करने के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।

पूर्व पर्यावरण मंत्री रमेश ने अपने पत्र में कहा कि उन्होंने 16 मई 2026 को भी रक्षा मंत्री को पत्र लिखकर सुझाव दिया था कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के प्रतिकूल पारिस्थितिक प्रभावों को कम करने और साथ ही रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ग्रेट निकोबार द्वीप के गांधी नगर-शास्त्री नगर क्षेत्र में नया ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा बनाने के बजाय कैंपबेल बे स्थित आईएनएस बाज के मौजूदा रनवे का विस्तार एक विकल्प हो सकता है।

उन्होंने कहा, ‘‘आठ जून 2026 को मीडिया में रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से खबरें आईं कि आईएनएस बाज के रनवे का विस्तार सीमित रखा जाएगा, क्योंकि इसकी लंबाई 4,500 फुट से अधिक करने पर प्रतिकूल पर्यावरणीय प्रभाव पड़ेंगे।’’

रमेश ने कहा, ‘‘पर्यावरण संरक्षण को लेकर अचानक दिखाई गई इस चिंता की मैं सराहना करता हूं, लेकिन कृपया निम्नलिखित तथ्यों पर भी विचार करें : गांधी नगर-शास्त्री नगर में प्रस्तावित हवाई अड्डे के लिए 115 मीटर ऊंचाई वाली दो वनाच्छादित पहाड़ियों को काटना पड़ेगा। यह क्षेत्र लगभग 225 एकड़ संरक्षित वन और 130 एकड़ माने गए (डीम्ड) वन क्षेत्र में फैला है, जो शोम्पेन जनजातीय समुदाय के क्षेत्र का हिस्सा है और वर्तमान में उनके उपयोग में है।’’

रमेश ने कहा कि प्रस्तावित स्थल लगभग 142 एकड़ के ऐसे क्षेत्र में है, जो द्वीपीय तटीय विनियमन क्षेत्र (आईसीआरजेड)-1ए के अंतर्गत आता है और जिसे तटीय विनियमन क्षेत्र (सीआरजेड) अधिसूचना, 2019 के तहत सर्वोच्च स्तर का संरक्षण प्राप्त है। इसमें कछुओं के अंडे देने वाले समुद्र तट, प्रवाल भित्तियां और संकटग्रस्त निकोबार मेगापोड पक्षी के घोंसला-स्थल शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए एक खाड़ी को भरना होगा और खारे पानी के मगरमच्छों को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करना पड़ेगा। इसके अलावा, प्रस्तावित स्थल पर दो गांव स्थित हैं, जहां 234 पूर्व सैनिक परिवार रहते हैं और उन्हें हाल के वर्षों में तीसरी बार विस्थापन झेलना पड़ेगा।

रमेश ने यह भी कहा कि यह स्थल एक लगभग अछूते और प्राकृतिक वन क्षेत्र में स्थित है, जिसके आसपास अत्यंत संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र हैं।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित स्थल का कोई गंभीर और व्यवस्थित पर्यावरणीय प्रभाव आकलन नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार को एक महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र, स्थानिक पक्षी क्षेत्र और दो अंतरराष्ट्रीय पक्षी प्रवासन मार्गों के संगम क्षेत्र के रूप में मान्यता प्राप्त है, जहां हर वर्ष बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि गलाथिया बे स्थित प्रस्तावित हवाई अड्डे को 30 मार्च 2022 को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने द्वि-उद्देश्यीय (सिविल एवं सैन्य) हवाई अड्डा घोषित किया था। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय को इस संबंध में कोई टिप्पणी करने में छह वर्ष से अधिक समय लग गया और वह भी केवल मौखिक तथा गुमनाम स्रोतों के माध्यम से।

उन्होंने कहा, ‘‘रक्षा मंत्रालय को ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के विनाशकारी पर्यावरणीय प्रभाव अब पूरी तरह स्पष्ट हो चुके हैं और व्यापक चिंता का कारण बन रहे हैं। इस परियोजना में प्रस्तावित हवाई अड्डे के अलावा ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह, टाउनशिप और अन्य सुविधाएं भी शामिल हैं।’’

कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि कुछ प्रतिष्ठित नौसेना अधिकारियों द्वारा सुझाए गए आईएनएस बाज रनवे के पूर्ण विस्तार को खारिज करने के फैसले पर पुनर्विचार करें।’’

उन्होंने इस पत्र की प्रति केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव को भी भेजी। रमेश ने कहा कि वह पिछले दो वर्षों में कम से कम चार बार उन्हें पत्र लिखकर ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन की ‘‘संदिग्ध प्रकृति’’ की ओर ध्यान दिला चुके हैं।

रमेश का यह पत्र ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने कहा था कि भारत अपनी सामरिक समुद्री और आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना पर काम कर रहा है।

इस बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि सरकार का यह दावा कि ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना रक्षा और ट्रांसशिपमेंट पोर्ट के लिए है, ‘‘झूठ’’ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह परियोजना वास्तव में एक उद्योगपति को लाभ पहुंचाने के लिए है, ताकि वह भारत की सबसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमि पर होटल और कसीनो बना सके।

राहुल गांधी ने इस महीने की शुरुआत में अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह की अपनी अप्रैल के अंत में हुई यात्रा पर आधारित 16 मिनट से अधिक अवधि का एक वीडियो भी जारी किया था। उन्होंने लोगों से एक याचिका पर हस्ताक्षर करने की अपील करते हुए कहा था- ‘‘हम लालच नहीं, हरियाली को चुनते हैं।’’

भाषा गोला शोभना

शोभना


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