कोलकाता, 28 जुलाई (भाषा) अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने मंगलवार को मध्य कोलकाता में एक मार्च निकाला, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक मामले में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के राजनीतिक रुख को बदलना था।
एबीवीपी ने वामपंथी छात्र संगठनों पर आरोप लगाया कि वे देश को अस्थिर करने के लिए इस आंदोलन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
शिक्षा संस्कृति सुरक्षा मंच के बैनर तले निकाले गए दो जुलूसों में एबीवीपी कार्यकर्ताओं के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने भी हिस्सा लिया। ये जुलूस सियालदह और हावड़ा से एस्प्लेनेड तक निकाले गए, जिनमें शामिल लोग राष्ट्रीय ध्वज थामे हुए थे और उन्होंने कथित ‘‘राष्ट्र विरोधी ताकतों’’ के खिलाफ नारे लगाए।
यह प्रदर्शन पश्चिम बंगाल में नीट विवाद को लेकर जारी सड़क आंदोलनों के बीच संघ परिवार की ओर से सबसे बड़ा राजनीतिक जवाब माना जा रहा है। नीट विवाद को लेकर वामपंथी छात्र संगठनों ने लगातार प्रदर्शन किए हैं और उन्हें अन्य विपक्षी समूहों का समर्थन भी मिला है।
एबीवीपी नेताओं ने आरोप लगाया कि नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं की निंदा की जानी चाहिए और सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए, लेकिन कुछ संगठन छात्र मुद्दे को व्यापक राजनीतिक आंदोलन में बदलने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य अशांति फैलाना है।
एबीवीपी के एक कार्यकर्ता ने कहा, ‘‘हम किसी भी परीक्षा में अनियमितता या पेपर लीक का समर्थन नहीं करते, लेकिन छात्र आंदोलन की आड़ में देश में अव्यवस्था फैलाने और देश की छवि खराब करने का संगठित प्रयास किया जा रहा है। हम ऐसी ताकतों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।’’
इस रैली में संघ से जुड़े शिक्षक, शिक्षाविद और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया।
मंगलवार का यह प्रदर्शन पश्चिम बंगाल में नीट मुद्दे को लेकर तेज होते राजनीतिक मुकाबले के बीच हुआ, जहां विभिन्न वैचारिक समूह सड़कों पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
पिछले कुछ सप्ताह में वाम समर्थित छात्र संगठनों ने कोलकाता में कई प्रदर्शन किए हैं और परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने केंद्र सरकार पर प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
वहीं, संघ परिवार का कहना है कि कथित पेपर लीक की जांच और सुधारात्मक कदम जरूरी हैं, लेकिन आंदोलन को धीरे-धीरे राजनीतिक समूहों ने अपने कब्जे में ले लिया है, जो इसका इस्तेमाल सरकार विरोधी माहौल बनाने के लिए कर रहे हैं।
इसलिए एबीवीपी का अभियान परीक्षा सुधारों से आगे इस बहस को ले जाने और खुद को ‘राष्ट्रहित’ की रक्षा करने वाले संगठन के रूप में पेश करने का प्रयास है। संगठन का आरोप है कि कुछ लोग छात्र असंतोष का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं।
यह प्रदर्शन पिछले सप्ताह कोलकाता में नीट विवाद को लेकर निकाले गए मार्च के दौरान हुई हिंसा की पृष्ठभूमि में भी हुआ। वाम समर्थित संगठनों द्वारा आयोजित उस प्रदर्शन में झड़पें हुई थीं और कार्यक्रम को कवर कर रहे पत्रकारों पर हमले के आरोप लगे थे।
इसके बाद पुलिस ने राज्य के दंगा-रोधी कानूनों के तहत 16 लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप था कि उन्होंने जानबूझकर प्रदर्शन के दौरान हिंसा की साजिश रची। मामले की जांच जारी है।
एबीवीपी नेताओं ने मंगलवार के मार्च में उन घटनाओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि हिंसा और मीडिया कर्मियों पर हमलों के साथ प्रदर्शन करने वालों की ‘‘असलियत’’ सामने आ गई है।
संघ परिवार ने संकेत दिया है कि मंगलवार का कार्यक्रम पश्चिम बंगाल में व्यापक अभियान का हिस्सा है। एबीवीपी के अलावा शिक्षक, शिक्षाविद और शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े संगठनों ने भी शिक्षा संस्कृति सुरक्षा मंच के तत्वावधान में जिला स्तर पर रैलियां निकालने, जनसभाएं आयोजित करने और जागरूकता अभियान चलाने की घोषणा की है।
इस अभियान का उद्देश्य वाम संगठनों पर नीट विवाद को लेकर जन विमर्श पर एकाधिकार करने और छात्र असंतोष का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए उसका मुकाबला करना है।
नीट परीक्षा विवाद से जुड़े समानांतर सड़क अभियानों से यह स्पष्ट है कि कथित परीक्षा घोटाला अब केवल शैक्षणिक मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का एक नया क्षेत्र बन गया है, जहां वाम और संघ परिवार से जुड़े संगठन अपने-अपने तर्कों के साथ जनसमर्थन जुटाने में लगे हैं।
भाषा अमित सुरेश
सुरेश