नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने ‘आयुर्वेद गुरुकुल संबद्धता पोर्टल’ की मंगलवार को शुरुआत की, जिसके जरिए देशभर के आयुर्वेद शिक्षण संस्थान मान्यता के लिए आवेदन कर सकते हैं। विश्वविद्यालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
विश्वविद्यालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.श्रीनिवास वरखेड़ी एवं भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) की अध्यक्ष डॉ. मनीषा कोठेकर ने संयुक्त रूप से पोर्टल की शुरुआत की।
इसी के साथ दोनों ने आयुर्वेद गुरुकुलों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देशों को भी जारी किया।
बयान के मुताबिक, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय इस पोर्टल की नोडल एजेंसी रूप में कार्य करेगा और देशभर की संस्थाएं आयुर्वेद गुरुकुलम् के लिये इस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगी।
इसमें कहा गया है कि पंजीकरण, निरीक्षण एवं संबद्धता की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, सुव्यवस्थित और पूर्णतः डिजिटल बनाया गया है, जिससे गुरुकुल आधारित आयुर्वेद शिक्षा को एक सशक्त राष्ट्रीय नियामक ढांचा प्राप्त होगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति वरखेड़ी ने कहा कि आयुर्वेद केवल चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन शैली है, जिसकी जड़ें संस्कृत शास्त्रों में निहित हैं।
एनसीआईएसएम की प्रमुख डॉ कोठेकर ने कहा कि यह पहल आयुर्वेद में शास्त्रीय प्रामाणिकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं पारदर्शिता को नई दिशा देगी।
बयान में यह भी जानकारी दी गई कि विश्वविद्यालय नीट की तर्ज पर प्री–बीएएमएस (प्री–आयुर्वेद) प्रवेश परीक्षा आयोजित करेगा। इसी के माध्यम से छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा और आयुर्वेद गुरुकुलों को मान्यता प्रदान की जाएगी।
इसमें कहा गया है कि विश्वविद्यालय अपने परिसरों में भी आयुर्वेद गुरुकुल कार्यक्रम शुरू करेगा, जिसकी शुरुआत नासिक परिसर सहित दिल्ली और अन्य केंद्रों से की जाएगी।
बयान के अनुसार, यह पहल एनसीआईएसएम के प्री–आयुर्वेद प्रोग्राम बीएएमएस फ्रेमवर्क के तहत संचालित की जा रही है, जिसमें कुल सात वर्ष छह माह की समेकित अवधि का पाठ्यक्रम निर्धारित किया गया है। इसमें दो वर्ष का प्री–आयुर्वेद कार्यक्रम, साढ़े चार वर्ष का बीएएमएस पाठ्यक्रम और एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल होगी।
भाषा नोमान पवनेश दिलीप
दिलीप