मिजोरम में ‘रीड स्नेक’ की नयी प्रजाति की पहचान की गई

मिजोरम में ‘रीड स्नेक’ की नयी प्रजाति की पहचान की गई

मिजोरम में ‘रीड स्नेक’ की नयी प्रजाति की पहचान की गई
Modified Date: January 6, 2026 / 11:26 am IST
Published Date: January 6, 2026 11:26 am IST

( तस्वीर सहित )

आइजोल, छह जनवरी (भाषा) मिजोरम के वैज्ञानिकों ने रूस, जर्मनी और वियतनाम के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर राज्य में ‘रीड स्नेक’ की एक नयी प्रजाति की पहचान की है। इस खोज से इस सांप की पहचान को लेकर लंबे समय से चला आ रहा भ्रम दूर हो गया है और भारत में पाए जाने वाले सरीसृपों (रेंगने वाले जीवों) की सूची में एक नयी प्रजाति जुड़ गई है।

मिजोरम विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग के प्रोफेसर और शोध दल के प्रमुख एच टी लालरेमसंगा ने बताया कि सांप की इस नयी प्रजाति का नाम राज्य के नाम पर ‘कैलामारिया मिजोरमेंसिस’ रखा गया है।

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उन्होंने बताया कि विस्तृत शारीरिक परीक्षण और डीएनए विश्लेषण पर आधारित यह शोध सोमवार को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका ‘जूटाक्सा’ में प्रकाशित हुआ।

लालरेमसंगा के अनुसार, इस सांप के नमूने पहली बार 2008 में मिजोरम में एकत्र किए गए थे, लेकिन उस समय इन्हें दक्षिण-पूर्व एशिया में व्यापक रूप से पाई जाने वाली एक अन्य प्रजाति का हिस्सा माना गया था।

उन्होंने कहा कि नए अध्ययन से यह स्थापित हुआ है कि मिजोरम में पाई जाने वाली यह आबादी एक विशिष्ट विकासवादी वंशावली का प्रतिनिधित्व करती है, जो केवल इसी राज्य में पाई जाती है।

उन्होंने बताया कि शोध टीम ने आइजोल, रीक, सिहफिर और सावलेंग के साथ-साथ मामित और कोलासिब जिलों के जंगली इलाकों से एक दशक से अधिक समय में एकत्र किए गए नमूनों का विश्लेषण किया।

लालरेमसंगा ने कहा कि आनुवंशिक तुलना से पता चला है कि मिजोरम का यह ‘रीड स्नेक’ अपने निकटतम ज्ञात रिश्तेदारों से 15 प्रतिशत से अधिक भिन्न है। किसी भी जीव को नयी प्रजाति के रूप में मान्यता देने के लिए यह अंतर पर्याप्त माना जाता है।

अध्ययन में कहा गया है कि वर्तमान में इस प्रजाति की पुष्टि केवल मिजोरम में हुई है, हालांकि पड़ोसी क्षेत्रों में इसकी मौजूदगी से इनकार नहीं किया जा सकता है।

इसके अनुसार, ‘मणिपुर, नगालैंड और असम जैसे राज्यों में भी इसके मिलने की संभावना है। साथ ही बांग्लादेश के चटगांव क्षेत्र में भी इसकी मौजूदगी की पुष्टि के लिए शोध की आवश्यकता है।’

विश्व स्तर पर ‘कैलामारिया’ वंश की 69 प्रजातियां हैं, जिनमें से अधिकांश छोटी और एकांतप्रिय होती हैं। इनके बारे में बहुत कम शोध हुआ है। मिजोरम में मिली यह नयी प्रजाति जहरीली नहीं है और इंसानों के लिए कोई खतरा नहीं है।

अध्ययन के अनुसार, यह सांप रात में सक्रिय होता है और जमीन के नीचे या मिट्टी में दबकर रहना पसंद करता है। यह नम और पहाड़ी जंगली वातावरण में रहता है। इसे समुद्र तल से 670 से 1,295 मीटर की ऊंचाई पर पाया गया है, जिसमें मिजोरम विश्वविद्यालय परिसर जैसे मानव बस्तियों के करीबी इलाके भी शामिल हैं।

शोधकर्ताओं ने फिलहाल इस प्रजाति को आईयूसीएन की रेड लिस्ट के मापदंडों के तहत ‘कम चिंताजनक’ श्रेणी में रखा है, क्योंकि यह कई जगहों पर पाई जाती है और फिलहाल इसे इंसानी गतिविधियों या आबादी से कोई बड़ा खतरा नहीं है।

भाषा सुमित मनीषा

मनीषा


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