ग्रेट निकोबार परियोजना को एनजीटी की मंजूरी दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक : विशेषज्ञ

ग्रेट निकोबार परियोजना को एनजीटी की मंजूरी दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक : विशेषज्ञ

ग्रेट निकोबार परियोजना को एनजीटी की मंजूरी दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक : विशेषज्ञ
Modified Date: February 17, 2026 / 09:20 pm IST
Published Date: February 17, 2026 9:20 pm IST

नयी दिल्ली, 17 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा ग्रेट निकोबार परियोजना को दी गई मंजूरी निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है तथा इसके विनाशकारी पारिस्थितिकी प्रभाव हो सकते हैं। पर्यावरणविदों ने यह बात कही।

एनजीटी ने सोमवार को यह कहते हुए ग्रेट निकोबार द्वीप समूह में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय कंटेनर माल ढुलाई टर्मिनल को मंजूरी दे दी कि पर्यावरण मंजूरी (ईसी) की शर्तों में पर्याप्त सुरक्षा उपाय प्रदान किए गए हैं।

हरित निकाय के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली कोलकाता की पूर्वी क्षेत्रीय पीठ ने प्रस्तावित टर्मिनल, टाउनशिप, क्षेत्र विकास और 450 मेगावाट के गैस एवं सौर ऊर्जा आधारित बिजली संयंत्र पर आपत्तियों की सुनवाई करते हुए सोमवार को यह आदेश पारित किया।

परियोजना के मुखर विरोधी रहे कांग्रेस सांसद और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने इस फैसले को ‘‘निराशाजनक’’ बताया।

रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “ग्रेट निकोबार परियोजना को राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा दी गई मंजूरी बेहद निराशाजनक है। इस बात के स्पष्ट प्रमाण हैं कि इस परियोजना के पारिस्थितिकी तंत्र पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेंगे।”

मुंबई आधारित गैर-लाभकारी संस्था ‘कंजर्वेशन एक्शन ट्रस्ट’ की कार्यकारी न्यासी देबी गोयनका ने एनजीटी की मंजूरी को ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण’’ बताया।

यह ट्रस्ट उन संस्थाओं में से एक है जिसने अदालत में इस परियोजना को चुनौती दी है।

गोयनका ने कहा, “यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। एनजीटी के पहले के फैसले के खिलाफ हमारी अपील कलकत्ता उच्च न्यायालय में लंबित है। हमें उम्मीद है कि इस पर शीघ्र सुनवाई होगी।’’

राज्यसभा के पूर्व सदस्य जवाहर सरकार ने कहा, ‘‘यह अविश्वसनीय है, अस्वीकार्य है!’’

उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, “राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने ग्रेट निकोबार की अमूल्य वनस्पतियों और जीवों के संहार को एक बंदरगाह (जिसे निश्चित रूप से कोई चहेता मुनाफाखोरी के लिए हथिया लेगा) और नौसैन्य चौकी के लिए मंजूरी दे दी है! एक पूरी जनजाति विलुप्त हो जाएगी, और यह परियोजना पारिस्थितिकी रूप से अत्यंत नाजुक एक क्षेत्र को खतरे में डाल देगी।”

भाषा

नेत्रपाल पवनेश

पवनेश


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