एनजीटी ने अरुणाचल प्रदेश की लौह मिश्र धातु इकाइयों के खिलाफ प्रदूषण मामले में सुनवाई शुरू की
एनजीटी ने अरुणाचल प्रदेश की लौह मिश्र धातु इकाइयों के खिलाफ प्रदूषण मामले में सुनवाई शुरू की
ईटानगर, 12 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की कोलकाता पीठ ने एक याचिका के बाद अरुणाचल प्रदेश के नाहरलागुन में संचालित दो लौह मिश्र धातु उद्योगों द्वारा कथित तौर पर किए गए बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय प्रदूषण का संज्ञान लिया है। याचिका में दावा किया गया है कि इन उद्योगों के प्रदूषण के कारण आसपास के कई गांवों में हवा, पानी और मृदा का गंभीर प्रदूषण हुआ है।
यह मामला नौ मार्च को न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी (न्यायिक सदस्य) और न्यायमूर्ति डॉ. ए. सेंथिल वेल (विशेषज्ञ सदस्य) के समक्ष सुनवाई के लिए आया, जिसे इंडस्ट्रियल ग्रोथ सेंटर पॉल्यूशन एफेक्टेड पीपल्स फोरम (आईजीसीपीएपीएफ) और डिशिंग तागी ने दायर किया था।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि लौह मिश्र धातु की ये दोनों कंपनियां ऐसे प्रदूषक छोड़ रही हैं जो रुक्सिन, निगलोक, न्गोरलुंग, रालुंग, मिकोंग, मंगनांग और लिंगका सहित कई गांवों को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, कारखानों की चिमनियों से निकलने वाला धुआं और धूल के कण घने होकर आसपास के वातावरण में फैल जाते हैं। बताया जाता है कि यह धूल कृषि क्षेत्रों और बागवानी फसलों पर भी जम रही है, साथ ही यह ग्रामीणों द्वारा पीने के पानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुओं, सामुदायिक तालाबों और नालों को भी दूषित कर रही है।
अर्जी में दावा किया गया है कि प्रदूषण के कारण जैव विविधता में गिरावट आई है, जिससे विशेष रूप से मेंढक, मछली और अन्य जलीय प्रजातियां प्रभावित हुई हैं जबकि निवासियों ने श्वसन संबंधी बीमारियों, गंभीर ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों के फाइब्रोसिस और सिलिकोसिस जैसी स्वास्थ्य समस्याओं की भी शिकायत की है।
अधिकरण ने अपने समक्ष प्रस्तुत किए गए आवेदनों और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद पाया कि यह मामला राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण अधिनियम, 2010 की अनुसूची एक में सूचीबद्ध प्रावधानों के अंतर्गत महत्वपूर्ण पर्यावरणीय प्रश्नों से संबंधित है।
इसके बाद अधिकरण ने अरुणाचल प्रदेश सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों सहित प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब प्रस्तुत करने को कहा।
अधिकरण ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख छह अप्रैल तय की है।
भाषा सुरभि पवनेश
पवनेश

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