नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे एक रिहायशी सोसाइटी में सीवेज और ठोस कचरे का सही प्रबंधन न करने के लिए मेरठ स्थित एक बिल्डर से पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) के रूप में 10 करोड़ रुपये वसूलें।
एनजीटी एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें लगातार पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का दावा किया गया था। इन उल्लंघनों में ‘गॉडविन कंस्ट्रक्शन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा विकसित मेरठ की ग्रीनवुड सिटी कॉलोनी में सीवेज का ओवरफ्लो होना, सीवेज शोधन के लिए अपर्याप्त बुनियादी ढांचा, ठोस कचरे का खराब प्रबंधन और जल निकासी की समस्याएं शामिल थीं।
याचिका में एनजीटी के मई 2025 के उस आदेश को लागू करने का भी अनुरोध किया गया था जिसमें बिल्डर को सुधारात्मक उपाय करने का निर्देश दिया गया था। इन उपायों में छह महीने के भीतर जल-मल शोधन संयंत्र (एसटीपी) का निर्माण और बिल्डर द्वारा पर्यावरण क्षतिपूर्ति के तौर पर 10 करोड़ रुपये जमा करना शामिल था।
हाल में दिए गए एक आदेश में, न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल की पीठ ने गौर किया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने एक हलफनामा दाखिल किया है।
इस हलफनामे में कहा गया है कि एनजीटी के पिछले निर्देशों के बावजूद बिल्डर अनिवार्य रूप से एसटीपी निर्माण में विफल रहा है और फिलहाल सीवेज को शहर के वेद व्यासपुरी इलाके में बने एक एसटीपी में भेजा जा रहा है।
एनजीटी ने कहा, ‘‘हम निर्देश देते हैं कि राज्य सरकार कानून के अनुसार तय समय सीमा के भीतर पर्यावरण क्षतिपूर्ति के तौर पर 10 करोड़ रुपये वसूले और इस अधिकरण को सूचित करे।’’
मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।
भाषा शफीक देवेंद्र
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