नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 200 एकड़ क्षेत्र में फैले शहरी वन क्षेत्र ‘साई उपवन’ में ठोस कचरा एवं अपशिष्ट प्रबंधन की खामियों को लेकर केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है ।
हरित निकाय इस मामले में दायर याचिका की सुनवाई कर रहा था, जिसमें साई उपवन में कचरे का लगातार फेंकना और जलाना, साथ ही इसके माध्यम से गुजर रहे तूफानी जल निकासी नाले का जाम होना शामिल था।
पूर्व नगर निगम पार्षद राजेंद्र त्यागी ने अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ के माध्यम से दायर याचिका में कहा है कि गाजियाबाद के मास्टर प्लान में सिटी फॉरेस्ट के रूप में चिन्हित इस क्षेत्र में लगभग 70,000 पेड़ नष्ट हो रहे हैं।
एनजीटी की अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज़ अहमद की पीठ ने 19 मार्च के आदेश में कहा, ‘‘याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने साई उपवन सिटी में ठोस कचरे के अव्यवस्थित निपटान की समस्या उठाई है।’’
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में अवैध रूप से कचरा फेंका जा रहा है और उसका जलाना भी होता है, जिससे लगभग 70,000 पेड़ सूख रहे हैं।’’
अधिकारियों ने अपशिष्ट प्रबंधन की अनियमितताओं का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया कि बारिश के मौसम में सीवेज के बहाव के कारण क्षेत्र का एक हिस्सा जलमग्न हो जाता है।
अदालत ने कहा, ‘‘उत्तरदाता पक्षों को नोटिस जारी करें कि वे अगली सुनवाई (2 जुलाई) से कम से कम एक सप्ताह पहले हलफनामे के माध्यम से अपना जवाब/प्रतिक्रिया प्रस्तुत करें।’’
इस मामले में उत्तरदाता पक्ष में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, उत्तर प्रदेश सरकार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जिला मजिस्ट्रेट, उप्र वन विभाग, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और गाजियाबाद नगर निगम शामिल है ।
याचिका में यह भी जोर दिया गया कि गाजियाबाद जैसे अत्यधिक प्रदूषित शहर में साई उपवन लाखों निवासियों को ताजी हवा उपलब्ध कराकर स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है।
भाषा रंजन नरेश
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