नयी दिल्ली, 29 जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने झारखंड सरकार को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में खाली पदों को भरने में ढिलाई बरतने के लिए कड़ी फटकार लगाई है।
पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के खिलाफ भारत की लड़ाई में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के “कमजोर कड़ी” होने से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रही एनजीटी ने 23 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और प्रदूषण नियंत्रण समितियों में तय मानकों के अनुसार जरूरी सुविधाएं न होने के कारण बताएं।
इससे पहले, एनजीटी ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया था, जिसमें कहा गया था कि जरूरी सुविधाओं की कमी, बड़ी संख्या में तकनीकी पदों सहित अन्य स्वीकृत पदों पर नियुक्ति न होने, कर्मचारियों को उचित प्रशिक्षण न मिलने, प्रदूषण की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए जरूरी उपकरणों की कमी तथा तकनीकी रूप से सक्षम नेतृत्व के अभाव के कारण ये बोर्ड और समितियां प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रही हैं।
एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने 28 जुलाई के अपने आदेश में कहा कि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) के सदस्य सचिव की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, बोर्ड में कुल स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 52 फीसदी कार्यबल ही उपलब्ध है, जिनमें संविदा कर्मी भी शामिल हैं।
इस आदेश की प्रति बुधवार को उपलब्ध कराई गई।
पीठ ने कहा कि झारखंड राज्य की स्थापना के 26 साल बाद भी जेएसपीसीबी के भर्ती नियम अधिसूचित नहीं किए गए हैं और वे राज्य सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।
उसने कहा, “इससे पता चलता है कि जेएसपीसीबी या झारखंड सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में खाली पदों को भरने के मामले को गंभीरता से नहीं लिया है और इस दिशा में अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं, जिसका बुरा असर बोर्ड के कामकाज पर पड़ा है।”
एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की इस दलील पर भी गौर किया कि 23 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों ने इस सिलसिले में अपने जवाब दाखिल नहीं किए हैं कि उनके प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और समितियों में “निर्धारित मानकों के अनुसार जरूरी सुविधाएं” क्यों उपलब्ध नहीं हैं।
हरित अधिकरण ने 10 अप्रैल को हुई पिछली सुनवाई में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और समितियों में मौजूद कमियों का संज्ञान लेते हुए संबंधित राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को निर्देश दिया था कि वे इनके पीछे के कारणों की जानकारी सीपीसीबी को उपलब्ध कराएं।
निर्देश की अनदेखी करने वाले राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में बिहार, हरियाणा, गुजरात, पंजाब, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, तेलंगाना, गोवा, सिक्किम, लद्दाख और चंडीगढ़ शामिल हैं।
एनजीटी ने कहा, “इन राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों को पहले के आदेश के मुताबिक चार हफ्ते के अंदर जरूरी कार्रवाई करनी होगी।”
अधिकरण ने मामले की अगली सुनवाई आठ अक्टूबर को तय की।
भाषा
पारुल सुरेश
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