नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य के भूगर्भ जल विभाग को नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा में अवैध वाहन धुलाई केंद्रों के संबंध में नयी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
एनजीटी ने एक समाचार पत्र में प्रकाशित उस रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया है, जिसमें दावा किया गया है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में करीब 1,000 अवैध वाहन धुलाई केंद्र हर महीने लगभग 30 करोड़ लीटर पानी बर्बाद कर रहे हैं। अधिकरण ने इसी मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि राज्य के भूगर्भ जल विभाग ने अपनी रिपोर्ट में गौतम बुद्ध नगर में 193 वाहन धुलाई केंद्रों की पहचान किए जाने की जानकारी दी है, जिनमें 55 औद्योगिक क्षेत्रों में और 138 गैर-औद्योगिक क्षेत्रों में हैं।
पीठ ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार, औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित 55 इकाइयों में से केवल 14 के पास आवश्यक अनुमति है, जबकि 12 इकाइयों के आवेदन लंबित हैं।
पीठ ने कहा कि 23 इकाइयां बिना किसी अनुमति के संचालित होती पाई गईं और उन्होंने अनुमति के लिए आवेदन भी नहीं किया था। जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद ने इन इकाइयों पर उत्तर प्रदेश भूगर्भ जल (प्रबंधन एवं विनियमन) अधिनियम के तहत दो-दो लाख रुपये का जुर्माना लगाने का फैसला किया है।
अधिकरण ने गैर-औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित 138 इकाइयों के संबंध में कहा कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के वकील ने उसे बताया कि इनमें से 100 इकाइयों की बिजली आपूर्ति पहले ही काट दी गई है।
हालांकि, अधिकरण ने इस संबंध में यूपीपीसीबी से ‘‘पूरी रिपोर्ट’’ मांगी है।
एनजीटी ने प्राधिकारियों की ओर से दिए गए आंकड़ों में अंतर का भी संज्ञान लिया।
अधिकरण ने कहा, ‘‘यूपीपीसीबी की ओर से पेश वकील ने बताया कि 11 वाहन धुलाई इकाइयों के आंकड़ों में अंतर है। उनके अनुसार, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ऐसी कुल 204 इकाइयां हैं, जबकि जानकारी केवल 193 इकाइयों के संबंध में दी गई है।’’
अधिकरण ने भूगर्भ जल विभाग और यूपीपीसीबी को चार सप्ताह के भीतर नयी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
भाषा
सिम्मी दिलीप
दिलीप