NHM Employees Regularisation Order: 2 महीने के भीतर होगा एनएचएम कर्मचारियों का नियमितीकरण, खत्म हुआ रेगुलर किए जाने का इंतजार, आदेश जारी

NHM Employees Regularisation Order: 2 महीने के भीतर होगा एनएचएम कर्मचारियों का नियमितीकरण, खत्म हुआ रेगुलर किए जाने का इंतजार, आदेश जारी

NHM Employees Regularisation Order: 2 महीने के भीतर होगा एनएचएम कर्मचारियों का नियमितीकरण, खत्म हुआ रेगुलर किए जाने का इंतजार, आदेश जारी

NHM Employees Regularisation Order: 2 महीने के भीतर होगा एनएचएम कर्मचारियों का नियमितीकरण, खत्म हुआ रेगुलर किए जाने का इंतजार, आदेश जारी / Image: AI Generated

Modified Date: May 30, 2026 / 03:14 pm IST
Published Date: May 30, 2026 3:05 pm IST
HIGHLIGHTS
  • एनएचएम कर्मचारियों को नियमित करने का आदेश
  • कोर्ट ने राज्य सरकार को 8 सप्ताह का समय दिया
  • अनिश्चितता में रखना एक कल्याणकारी राज्य के लिए उचित नहीं : हाईकोर्ट

चंडीगढ़: NHM Employees Regularisation Order नियमितीकरण का लंबे समय से राह देख रहे एनएचएम कर्मचारियों को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने रेगुलर किए जाने को लेकर लगाई गई याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को आदेश दिया है कि 10 साल सेवा पूरी कर चुके सभी कर्मचारियों को नियमित करें और शासकीय सेवकों की तरह सुविधाएं प्रदार करें। कोर्ट ने नियमितीकण के लिए 8 सप्ताह का समय दिया है। ​यह आदेश न्यायाधीश संदीप मौदगिल की एकल पीठ ने दिया है।

2 महीने के भीतर होगा नियमितीकरण

NHM Employees Regularisation Order मिली जानकारी के अनुसार ​याचिकाकर्ता राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन – NHM) के तहत स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन, सैनिटेशन वर्कर्स, ड्राइवर और एएनएम (ANM) जैसे विभिन्न आवश्यक पदों पर पिछले 10 से 11 वर्षों से अनुबंध के आधार पर काम कर रहे थे। उनकी नियुक्तियां उचित विज्ञापन और जिला सिविल सर्जनों द्वारा गठित चयन समितियों की योग्यता सूची के आधार पर की गई थी। इसके बावजूद, हर साल उनके अनुबंध को तो बढ़ा दिया जाता था, लेकिन उन्हें नियमित नहीं किया जा रहा था, जिससे वे अनिश्चितता के माहौल में जीने को मजबूर थे।

हाईकोर्ट ने याचिका पर की सुनवाई

​हरियाणा सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि NHM केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित एक योजना है, जो 60:40 के फंडिंग पैटर्न (केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी) पर चलती है। यह एक परियोजना-आधारित अस्थायी व्यवस्था है, इसलिए सरकार पर इन्हें पक्का करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है और ऐसा करने से राज्य के खजाने पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

​न्यायाधीश संदीप मौदगिल ने की मामले में सुनवाई

​हालांकि, कोर्ट ने सरकार की इन सभी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता’ संविधान के तहत राज्य सूची का विषय है। पैसे भले ही केंद्र से आ रहे हों, लेकिन प्रशासनिक नियंत्रण और प्रबंधन पूरी तरह राज्य सरकार का है। ​न्यायाधीश संदीप मौदगिल ने अपने फैसले में राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, एक कल्याणकारी राज्य अपने कर्मचारियों को लंबे समय तक अनिश्चितता की स्थिति में रखने को न्यायसंगत नहीं ठहरा सकता।

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