एनएचआरसी प्रमुख ने विभिन्न संघर्षों के बीच पेरिस सिद्धांतों को “पूर्ण रूप से बदलने” पर जोर दिया

Ads

एनएचआरसी प्रमुख ने विभिन्न संघर्षों के बीच पेरिस सिद्धांतों को “पूर्ण रूप से बदलने” पर जोर दिया

  •  
  • Publish Date - March 8, 2026 / 09:37 AM IST,
    Updated On - March 8, 2026 / 09:37 AM IST

नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) दुनिया में जारी कई संघर्षों के बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यम (सेवानिवृत्त) ने मानवाधिकारों की बेहतर तरीके से रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय मानक स्थापित करने के उद्देश्य से पेरिस सिद्धांतों को ‘पूर्ण रूप से बदलने’ की बात कही।

शनिवार को यहां ‘रायसीना डायलॉग’ कार्यक्रम में ‘उथल-पुथल के समय में एनएचआरसी’ सत्र के दौरान उन्होंने कहा कि पेरिस सिद्धांत में केवल यह बताया गया है कि एक मानवाधिकार संस्थान किस तरह से गठित किया जाना चाहिए।

पेरिस सिद्धांत राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थानों के लिए 1993 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित मानक हैं।

बाद में इन्हें 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से मंजूरी दी गई थी। इनमें राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थान की स्थापना के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा सुझाए गए बुनियादी दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं।

दुनियाभर में जारी कई संघर्षों के बीच वर्तमान वैश्विक स्थिति पर बात करते हुए एनएचआरसी प्रमुख ने किसी देश या व्यक्ति का नाम लिए बगैर अफसोस जताते हुए कहा कि मानवाधिकारों के पालन के लिए पहली आवश्यकता है- ‘सच कहना, लेकिन आज कोई भी वैश्विक नेता पूरा सच नहीं बोल सकता।”

उन्होंने कहा कि कूटनीति, बहुपक्षीय रिश्तों और किसी देश के हितों के कारण यह सब होता है।

रामसुब्रमण्यम ने कहा, ‘आज हमें अत्यधिक कूटनीति का इस्तेमाल करना पड़ता है, शब्दों और नामों को चुनने में सावधानी बरतनी होती है।’

वैश्विक संघर्षों का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम ने कहा कि इतिहास की विडंबना यह है कि ‘अपराधी पीड़ित बन जाते हैं और पीड़ित अपराधी, वे अपनी भूमिका बदल लेते हैं।’

उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि 21वीं सदी का पहला आधा भाग, 20वीं सदी के पहले आधे भाग की तरह ही होगा। लिहाजा, हमें क्या करना चाहिए?’

एनएचआरसी प्रमुख ने ‘विभिन्न देशों के एनएचआरआई के बीच सहयोग’ की बात कही।

उन्होंने कहा कि अगर सभी एक समाज के रूप में एकजुट हो जाएं और नागरिक समाज एवं मानवाधिकार संस्थाओं को इतना मजबूत करें कि वे अपनी-अपनी सरकारों से यह सवाल कर सकें कि वे जो कर रही हैं, वह नहीं कर सकती, तो चीजें बेहतर हो सकती हैं।

एनएचआरसी प्रमुख ने कहा, ‘पेरिस सिद्धांतों का पूरी तरह से पुनर्गठन करने और उनमें सुधार की आवश्यकता है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मानक स्थापित किए जा सकें। जब ये स्थापित हो जाएं, तो ऐसे तीन से चार अंतरराष्ट्रीय निकाय होने चाहिए जो अपने-अपने देशों पर निगरानी रखें।’’

भाषा जोहेब सिम्मी

सिम्मी