नीतीश कटारा हत्याकांड: दिल्ली उच्च न्यायालय ने ‘फर्लो’ पर रिहा करने की विकास यादव की अर्जी खारिज की

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नीतीश कटारा हत्याकांड: दिल्ली उच्च न्यायालय ने ‘फर्लो’ पर रिहा करने की विकास यादव की अर्जी खारिज की

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  • Publish Date - February 11, 2026 / 05:24 PM IST,
    Updated On - February 11, 2026 / 05:24 PM IST

नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने कारोबारी नीतीश कटारा की हत्या के जुर्म में बिना किसी छूट के 25 साल की जेल की सजा काट रहे विकास यादव की ‘फर्लो’ पर जेल से रिहा करने संबंधी याचिका बुधवार को खारिज कर दी।

न्यायमूर्ति रवींद्र डुडेजा ने यह आदेश सुनाया।

यादव ने जेल प्रशासन के 29 अक्टूबर, 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी ‘फर्लो’ अर्जी खारिज कर दी गई थी।

फर्लो का मतलब जेल से अस्थायी रिहाई है, न कि पूरी सजा का निलंबन या माफी। यह आमतौर पर उन दीर्घकालिक कैदियों को दी जाती है, जिन्होंने अपनी सजा का एक हिस्सा पूरा कर लिया है।

विकास उत्तर प्रदेश के नेता डी पी यादव का बेटा है। उसके चचेरे भाई विशाल यादव को भी कटारा के अपहरण और हत्या के जुर्म में सजा सुनाई गई थी।

ये दोनों कटारा और भारती यादव (विकास की बहन) के कथित प्रेम प्रसंग के खिलाफ थे, क्योंकि वे अलग-अलग जातियों से थे।

उच्चतम न्यायालय ने कटारा के सनसनीखेज अपहरण और हत्या में विकास यादव और विशाल यादव की भूमिका को लेकर तीन अक्टूबर 2016 को उन्हें बिना किसी छूट के 25 वर्ष की कारावास की सजा सुनाई थी। सह-दोषी सुखदेव यादव को 20 वर्ष की कारावास की सजा सुनायी गयी थी।

उन्हें 16 और 17 फरवरी, 2002 की दरमियानी रात को एक शादी की पार्टी से कटारा का अपहरण करने और भारती के साथ कथित प्रेम संबंध के कारण उसकी हत्या करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था तथा सजा सुनाई गई थी।

भाषा राजकुमार सुरेश

सुरेश

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