वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज पर एनएमसी के कदम का भाजपा और प्रदर्शनकारी समूहों ने किया स्वागत

वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज पर एनएमसी के कदम का भाजपा और प्रदर्शनकारी समूहों ने किया स्वागत

वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज पर एनएमसी के कदम का भाजपा और प्रदर्शनकारी समूहों ने किया स्वागत
Modified Date: January 7, 2026 / 07:55 pm IST
Published Date: January 7, 2026 7:55 pm IST

जम्मू/श्रीनगर, सात जनवरी (भाषा) न्यूनतम मानकों का पालन न करने के कारण श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की अनुमति वापस लिये जाने के राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और संघर्ष समिति ने बुधवार को इस कदम का स्वागत किया, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने इसे क्षेत्र के लिए एक झटका करार दिया है।

भाजपा समर्थित दक्षिणपंथी संगठनों की ओर से हाल ही में गठित समूह ‘संघर्ष समिति’ पिछले साल नवंबर से जम्मू में आंदोलन का नेतृत्व कर रही है।

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संघर्ष समिति कॉलेज में हुए दाखिलों को रद्द करने की मांग करते हुए माता वैष्णो देवी में आस्था रखने वाले छात्रों के लिए विशेष रूप से सीटें आरक्षित करने की मांग भी कर रही है।

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की मेरिट सूची के माध्यम से एमबीबीएस के पहले बैच के 50 छात्रों के प्रवेश की प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद संघर्ष समिति का गठन हुआ।

इनमें से 42 छात्र मुस्लिम हैं-जिनमें से अधिकतर कश्मीर से हैं-साथ ही जम्मू के सात हिंदू छात्र और एक सिख छात्र भी शामिल है। संघर्ष समिति कॉलेज में किए गए दाखिलों को रद्द करने के अलावा हिंदू छात्रों के लिए सीटों को आरक्षित करने की मांग कर रही है।

राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) ने जम्मू-कश्मीर के रियासी में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस को दिया गया अनुमति पत्र न्यूनतम मानकों का पालन नहीं करने पर मंगलवार को वापस ले लिया।

बोर्ड ने मंगलवार को एक आदेश जारी किया जिसमें कहा गया है कि शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए काउंसलिंग के दौरान कॉलेज में दाखिला लेने वाले सभी छात्रों को केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के सक्षम प्राधिकार द्वारा जम्मू-कश्मीर के अन्य चिकित्सा संस्थानों में अतिरिक्त सीट (सुपरन्यूमरेरी) के तौर पर समायोजित किया जाएगा।

भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष सत शर्मा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड के निर्णय का स्वागत करते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अनुमति वापस लेकर छात्रों के भविष्य को सुरक्षित किया है। ’’

शर्मा ने कहा कि न्यूनतम मानकों का पालन न करने के आधार पर अनुमति वापस ले ली गई है, लेकिन विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक समूहों से जुड़े लोग पिछले कई दिनों से सड़कों पर उतरकर प्रवेश रद्द करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि यह संस्थान हिंदुओं के दान से चलता है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, ‘‘इस सफलता का श्रेय मैं माता वैष्णो देवी को देना चाहता हूं, क्योंकि यह आस्था का मामला था। अगर यह किसी अन्य मेडिकल कॉलेज के साथ होता, तो हम इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करते। एनएमसी ने शिकायतों पर कार्रवाई की और नड्डा ने दाखिला लेने वाले छात्रों के भविष्य को सुरक्षित किया, जो प्रशंसनीय है।’’

जब उनसे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा संघर्ष समिति की मांग पर नाराजगी जताने के बारे में पूछा गया तो सत शर्मा ने कहा, ‘‘ उमर अब्दुल्ला सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह के बयान देने के आदी हैं। उनकी सरकार लोगों को बिजली और पीने का पानी तक मुहैया कराने में नाकाम रही है। उनकी सरकार के प्रदर्शन में गिरावट आ रही है, जो बडगाम और नगरोटा विधानसभा उपचुनावों के परिणामों से स्पष्ट है।’’

संघर्ष समिति ने ढोल बजाकर और मिठाई बांटकर एनएमसी के फैसले का जश्न मनाया।

संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल (सेवानिवृत्त) सुखवीर सिंह मनकोटिया ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हम अपना 45 दिनों का सफल आंदोलन समाप्त करते हैं, लेकिन हम श्राइन बोर्ड की गतिविधियों पर नजर रखना जारी रखेंगे, जिसे सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप करने के बजाय केवल हिंदुओं के कल्याण के लिए काम करना चाहिए। ’’

नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेताओं ने भाजपा द्वारा कॉलेज की मान्यता रद्द करने की आलोचना करते हुए इसे ‘विभाजन की राजनीति’ करार दिया।

जम्मू-कश्मीर के जल शक्ति एवं जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद राणा ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है। लोग मंदिर-मस्जिद के नाम पर राजनीति करते रहे हैं, लेकिन आज हम धर्म और क्षेत्र के आधार पर बड़े संस्थानों में दाखिला पर भी राजनीति कर रहे हैं।’’

राणा ने कहा कि उनकी पार्टी नेकां, हमेशा से यह कहती आई है कि भाजपा की मंशा सही नहीं थी और ऐसे फैसले देश को ‘हजार साल पीछे’ ले जाते हैं।

राणा ने इस बात पर बल दिया कि जम्मू-कश्मीर हमेशा से हिंदू-मुस्लिम सौहार्द का उदाहरण रहा है और कहा कि यह निर्णय जम्मू में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद ‘इसके लिए माहौल तैयार होने’ पर लिया गया।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार धार्मिक भाईचारे को बनाए रखने के लिए प्रयास करेगी।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ‘संवैधानिक निकाय दक्षिणपंथी दबाव में आ रहे हैं’।

डार ने कहा, ‘‘ …इसीलिए तो समझ में आता है कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने एक महीने पहले उसी कॉलेज को मंजूरी दी थी और एक महीने बाद उसे रद्द कर दिया। भाजपा के सांप्रदायिक रुख के कारण जम्मू-कश्मीर एक और मेडिकल कॉलेज खोलने का सुनहरा अवसर खो बैठा।’’

डार ने कहा कि पूरे देश में लोग मेडिकल कॉलेज पाने के लिए संघर्ष करते हैं, लेकिन ‘यहां भाजपा ने अपनी सांप्रदायिक राजनीति के कारण यह सुनिश्चित कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर एक मेडिकल कॉलेज से वंचित रह जाए।’

नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर के लोग, विशेषकर युवा छात्र, हमेशा याद रखेंगे कि भाजपा ने ही उन्हें इस संस्था से वंचित किया था।’’

नेशनल कॉन्फ्रेंस के मीडिया प्रभारी (पीर पंजाल) विवेक शर्मा ने कहा कि माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज का बंद होना जम्मू के लिए एक गंभीर झटका है।

विवेक शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘जो कुछ सामने आया वह विभाजनकारी राजनीति से प्रेरित एक गलत मकसद वाला आंदोलन था, जिसमें कुछ तत्वों ने झूठे कथानक के तहत मुस्लिम छात्रों को निशाना बनाकर उन्हें हटाने की कोशिश की। विडंबना यह है कि लापरवाही से भरी इस राजनीति ने हिंदू छात्रों को भी नुकसान पहुंचाया है।’’

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने ”नफरत की राजनीति” की निंदा करते हुए कहा कि शिक्षण संस्थानों को ”सांप्रदायिक एजेंडों के लिए बलिदान करने के बजाय संवाद, अनुपालन और सुधार” के माध्यम से मजबूत किया जाना चाहिए।

पीडीपी के विधायक वहीद पारा ने कहा कि इस घटनाक्रम से देश भर में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बहुत ही नकारात्मक संदेश जाता है।

पीडीपी के प्रवक्ता आदित्य गुप्ता ने दावा किया कि कॉलेज बंद होने के लिए भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस जिम्मेदार हैं।

पीडीपी के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज को भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस की मिलीभगत के कारण बंद कर दिया गया। यह जम्मू के लिए एक बड़ा झटका है और भाजपा द्वारा इस क्षेत्र की जनता के साथ किए गए विश्वासघात को दर्शाता है।’’

कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष रमन भल्ला ने कहा कि इस फैसले से छात्रों को उन्नत चिकित्सा शिक्षा से वंचित किया गया है, स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को कमजोर किया गया है और साथ ही रोजगार के संभावित अवसरों को बंद कर दिया गया है।

भल्ला ने कहा, ‘‘ यह भेदभावपूर्ण कदम जम्मू में सौतेले व्यवहार और निरंतर उपेक्षा को दर्शाता है।’’

आर एस पुरा सीमावर्ती क्षेत्र के अग्रिम क्षेत्रों में एक जन संपर्क कार्यक्रम के दौरान भल्ला ने ये आरोप लगाए।

भाषा रवि कांत प्रशांत

प्रशांत


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