यूडीएफ की बैठक में केंद्र की पीएम श्री योजना पर कोई चर्चा नहीं हुईः केरल के मंत्री कुन्हालीकुट्टी

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यूडीएफ की बैठक में केंद्र की पीएम श्री योजना पर कोई चर्चा नहीं हुईः केरल के मंत्री कुन्हालीकुट्टी

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  • Publish Date - July 31, 2026 / 03:56 PM IST,
    Updated On - July 31, 2026 / 03:56 PM IST

तिरुवनंतपुरम, 31 जुलाई (भाषा) आईयूएमएल के वरिष्ठ नेता और केरल के मंत्री पी.के. कुन्हालीकुट्टी ने शुक्रवार को संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के संयोजक अडूर प्रकाश के उस दावे को गलत बताया कि सत्ताधारी गठबंधन ने केंद्र की पीएम श्री योजना को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी गठबंधन की बैठक में इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई थी।

उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा कि सरकार कैबिनेट की एक उपसमिति की रिपोर्ट मिलने के बाद ही कोई फैसला लेगी।

‘प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया’ (पीएम श्री) योजना को लागू करने को लेकर कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के बीच मतभेदों से जुड़ी मीडिया की खबरों को खारिज करते हुए, राज्य के उद्योग, वाणिज्य, आईटी और एआई मंत्री कुन्हालीकुट्टी ने कहा कि बृहस्पतिवार को यूडीएफ की बैठक में इस मामले पर कोई चर्चा नहीं हुई।

उन्होंने कहा, ‘‘यूडीएफ की बैठक में पीएम श्री के मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। कैबिनेट की एक उपसमिति इस मामले की जांच कर रही है। समिति की रिपोर्ट आने के बाद सरकार और यूडीएफ, दोनों ही इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे।’’

उन्होंने कहा कि पिछली वाम सरकार ने विधानसभा में यह कहने के बाद केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे कि राज्य का बकाया फंड हासिल करना जरूरी है।

उन्होंने कहा, ‘‘पूर्ववर्ती एलडीएफ सरकार ने ही समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। राज्य इससे पीछे हट सकता है या नहीं, यह उपसमिति की रिपोर्ट आने के बाद ही तय किया जा सकेगा।’’

हालांकि, कुन्हालीकुट्टी ने ज़ोर देकर कहा कि केरल स्कूल के पाठ्यक्रम या इस योजना के तहत संस्थानों के चयन को लेकर केंद्र की ओर से थोपी गई किसी भी शर्त को स्वीकार नहीं करेगा।

मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन की अध्यक्षता में हुई यूडीएफ की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में प्रकाश ने कहा था कि मौजूदा सरकार पिछली सरकार का ही विस्तार है, इसलिए वह इस योजना से पीछे नहीं हट सकती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किन स्कूलों में योजना लागू होगी, उनका सिलेबस क्या होगा और फंड का इस्तेमाल कैसे किया जाएगा—इसका फैसला करने का अधिकार राज्य के पास ही रहेगा, जबकि केंद्र से मिलने वाली आर्थिक मदद भी पूरी तरह सुनिश्चित की जाएगी।

भाषा संतोष पवनेश

पवनेश