राजस्थान में पांच साल में रोजगार कार्यालयों के जरिए कोई सरकारी नौकरी नहीं मिली: आरटीआई

राजस्थान में पांच साल में रोजगार कार्यालयों के जरिए कोई सरकारी नौकरी नहीं मिली: आरटीआई

राजस्थान में पांच साल में रोजगार कार्यालयों के जरिए कोई सरकारी नौकरी नहीं मिली: आरटीआई
Modified Date: March 17, 2026 / 05:58 pm IST
Published Date: March 17, 2026 5:58 pm IST

जयपुर, 17 मार्च (भाषा) राजस्थान के रोजगार कार्यालयों में इस समय 22 लाख से अधिक बेरोजगार युवा पंजीकृत हैं। यह जानकारी सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत मांगी गई सूचना से मिली है।

इसके अनुसार विगत पांच वर्षों में रोजगार कार्यालयों द्वारा सरकारी क्षेत्र में कोई भी रोजगार प्रदान नहीं किया गया है।

रोजगार निदेशालय द्वारा दी गई जानकारी से पता चलता है कि 14 जनवरी 2026 तक राज्य के जिला रोजगार कार्यालयों में कुल 22,21,317 उम्मीदवार रोजगार चाहने वालों के तौर पर पंजीकृत थे। इसके अनुसार इनमें से 13.08 लाख से अधिक पुरुष, लगभग 9.12 लाख महिलाएं और 989 ‘अन्य’ श्रेणी के हैं।

निदेशालय द्वारा दी गई जानकारी अनुसार जिलावार विश्लेषण किया जाए तो इस अवधि में जयपुर में सबसे ज्यादा 2.51 लाख बेरोजगार पंजीकृत हैं। उसके बाद अलवर (1.53 लाख), नागौर (1.34 लाख), झुंझुनू (1.22 लाख) और जोधपुर (86,320) का नंबर आता है। इसके उलट जैसलमेर (12,031) और प्रतापगढ़ (14,047) जिले में सबसे कम उम्मीदवार पंजीकृत थे।

श्रेणी-वार आंकड़े से पता चलता है कि पंजीकृत नौकरी चाहने वालों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के अभ्यर्थियों का हिस्सा सबसे अधिक है। उसके बाद सामान्य, अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य श्रेणियों के उम्मीदवार हैं।

निदेशालय द्वारा उपलब्ध करवाए गए आंकड़ों से गत पांच साल में निजी क्षेत्र में सीमित नियोजन की जानकारी भी सामने आती है। उपलब्ध करवाई गई जानकारी के मुताबिक रोजगार कार्यालयों की ‘रोजगार मेले’ व निजी कंपनियों के साथ समन्वय जैसी पहल के जरिए साल 2021 में 86, साल 2022 में 825, साल 2023 में तीन, साल 2024 में 23 और साल 2025 में 71 उम्मीदवारों को नौकरी मिली।

आरटीआई के जरिए जानकारी मांगने वाले चंद्र शेखर गौर ने कहा, ‘पिछले दो दशकों में निजी क्षेत्र में काफी तेज़ी से विकास हुआ है। करोड़ों का निवेश हुआ है लेकिन निदेशालय के जरिए उपलब्ध करवाई गई नौकरियां बहुत कम हैं। निदेशालय के जरिए सरकारी क्षेत्र में स्थाई व अस्थाई नौकरियां मिलना तो पूरी तरह से बंद ही हो गया लगता है। अब जरूरत है कि रोजगार कार्यालयों को फिर से सक्रिय किया जाए और उम्मीदवारों को आगे बढाया जाए।’

आरटीआई आवेदन में पिछले दो साल में राज्य में हुए निवेशक सम्मेलन के जरिए सृजित रोजगारों की जानकारी भी मांगी गई थी। हालांकि विभाग ने स्पष्ट किया कि यह जानकारी उससे जुड़ी हुई नहीं है।

विभाग ने एक प्रश्न के जवाब में यह भी कहा, ‘‘विगत पांच वर्षों में रोजगार कार्यालयों द्वारा सरकारी क्षेत्र में कोई भी रोजगार प्रदान नहीं किया गया है।’’

निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संपर्क करने पर कहा कि युवाओं को सरकारी विभागों में रिक्तियों की जानकारी देने के लिए निदेशालय नियमित रूप से ‘रोजगार संदेश’ पाक्षिक प्रकाशित करता है। साथ ही कई अन्य गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं।

राजस्थान के कौशल, रोजगार और उद्यमिता विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर बताया गया है कि रोजगार न‍िदेशालय अलग-अलग गतिविधियों और योजनाओं के जरिए नौकरी चाहने वालों की जरूरतों को पूरा कर रहा है। बेहतर समन्वय और कार्यक्रमों को तेजी से लागू करने के लिए मई 2015 में ‘कौशल, विकास और उद्यमिता विभाग’ की स्थापना की गई थी। इसके अनुसार विभाग के कामों में नौकरी चाहने वालों को अलग-अलग पाठ्यक्रमों और प्रशिक्षण सुविधाओं के बारे में ‘वोकेशनल गाइडेंस’ देना, नौकरी चाहने वालों की सूची नियोक्ताओं को भेजना, बेरोजगार युवाओं का पंजीकरण करना, रोजगार मेले आयोजित करना और समाज के कमजोर वर्गों के नौकरी चाहने वालों को विशेष योजनाओं के तहत मदद करना शामिल है।

भाषा पृथ्वी अमित

अमित


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