स्वयं पैरवी करने वाले पक्षकारों के मामलों की कार्यवाही का सीधा प्रसारण नहीं होगा: उच्चतम न्यायालय

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स्वयं पैरवी करने वाले पक्षकारों के मामलों की कार्यवाही का सीधा प्रसारण नहीं होगा: उच्चतम न्यायालय

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  • Publish Date - July 16, 2026 / 08:58 PM IST,
    Updated On - July 16, 2026 / 08:58 PM IST

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि बिना वकील के स्वयं अपना मामला पेश करने वाले पक्षकारों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये सुनवाई में शामिल होने का विकल्प दिया जाएगा और यदि वे अदालत में प्रत्यक्ष रूप से पेश होने पर जोर देते हैं तो उनके मामले की कार्यवाही का सीधा प्रसारण नहीं होगा।

यह फैसला एक पक्षकार द्वारा अदालत कक्ष में कथित तौर पर अपशब्द कहने और अपने मामले की फाइल फेंकने की घटना के कुछ दिन बाद लिया गया है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को चुनौती देने वाली अपनी याचिका पर स्वयं पैरवी कर रहे एक पक्षकार ने 10 जुलाई को सुनवाई के दौरान कथित तौर पर अपशब्द कहे और कानूनी दस्तावेज फेंके थे। इसके बाद उसे उच्चतम न्यायालय के अदालत कक्ष से जबरन बाहर निकाल दिया गया था।

पक्षकार प्रबल प्रताप सिंह और उसके सहयोगी चंदर भान को बाद में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दोनों कानून के छात्र हैं।

स्वयं अपनी पैरवी करने वाले पक्षकारों को ऑनलाइन माध्यम से पेश होने के लिए कहने का फैसला बृहस्पतिवार को हुई उच्चतम न्यायालय के सभी न्यायाधीशों की बैठक में लिया गया। बैठक में पुराने लंबित मामलों के निपटारे समेत न्यायालय के कामकाज को सुव्यवस्थित करने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी किए गए।

प्रस्ताव में कहा गया, ‘‘पूर्ण न्यायालय ने यह फैसला किया है कि उच्चतम न्यायालय नियम, 2013 के आदेश चार के नियम 1(सी) के तहत पंजीयक से बातचीत के दौरान स्वयं पैरवी करने वाले पक्षकारों को ऑनलाइन माध्यम से पेश होने का विकल्प दिया जाएगा।’’

इसमें कहा गया, ‘‘हालांकि, यदि ऐसे पक्षकार केवल प्रत्यक्ष रूप से पेश होने पर जोर देते हैं तो उन्हें इसकी अनुमति दी जाएगी लेकिन कार्यवाही का सीधा प्रसारण और वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं की जाएगी।’’

सभी न्यायाधीशों की बैठक में यह भी फैसला किया गया कि उच्चतम न्यायालय के सभी न्यायाधीश ‘समाधान समारोह’ नामक विशेष पहल में भाग लेंगे। इस पहल का समापन 21, 22 और 23 अगस्त को आयोजित विशेष लोक अदालत के साथ होगा।

‘‘भागीदारीपूर्ण न्याय’’ और ‘‘लोगों के द्वार तक न्याय पहुंचाने’’ की सोच को आगे बढ़ाने के लिए उच्चतम न्यायालय ‘सुप्रीम कोर्ट एक्शन फॉर मीडिएटेड एडजुडिकेशन एंड डिस्प्यूट्स हार्मोनाइजेशन अक्रॉस नेशन’ यानी देशभर में मध्यस्थता के जरिये विवादों के समाधान और उनमें सामंजस्य स्थापित करने की पहल- ‘समाधान समारोह’ आयोजित कर रहा है। यह पहल 21 अप्रैल को शुरू हुई थी और इसका समापन 21, 22 और 23 अगस्त को विशेष लोक अदालत के आयोजन के साथ होगा।

उच्चतम न्यायालय में लगातार बढ़ रहे लंबित मामलों की संख्या कम करने के लिए सभी न्यायाधीशों ने अंतिम सुनवाई के लिए तैयार करीब 100 समूहबद्ध मामलों पर सुनवाई करने का फैसला किया है। इनके निपटारे से लगभग 9,177 मामलों का समाधान हो जाएगा।

प्रस्ताव में कहा गया कि इन सभी मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के लिए संबंधित पीठों के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।

इन समूहबद्ध मामलों का निपटारा होने के बाद उन सबसे पुराने मामलों को मंगलवार, बुधवार और बृहस्पतिवार को सुनवाई के लिए लिया जाएगा, जिनमें नोटिस जारी किए जा चुके हैं।

मामलों को कार्यसूची में दिए गए क्रम के अनुसार सूचीबद्ध नहीं किए जाने संबंधी अधिवक्ता संगठनों और वकीलों की शिकायतों पर भी बैठक में गौर किया गया।

पूर्ण न्यायालय ने फैसला किया कि कार्यसूची को सरल बनाने और दैनिक कार्यसूची में मामलों को क्रमवार सुनवाई के लिए लेने में एकरूपता लाने के वास्ते आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

इन मुद्दों की समीक्षा करने और सुझाव देने के लिए न्यायाधीशों की एक समिति गठित की जाएगी।

बैठक में यह भी फैसला किया गया कि अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध मामलों में दलील देने वाले वकीलों को पहले ही बताना होगा कि वे अपनी मौखिक दलीलें कितने समय में पूरी करेंगे।

भाषा सिम्मी माधव

माधव