नयी दिल्ली, एक सितंबर (भाषा) विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने मंगलवार को ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ (एआईएमपीएलबी) के प्रस्तावित ‘‘संविधान और शरिया संरक्षण आंदोलन’’ का विरोध किया।
विहिप का आरोप है कि संविधान और इस्लामी कानून की एक-दूसरे से तुलना कर यह (मुस्लिम) संगठन ‘‘देश की एकता के साथ खिलवाड़’’ कर रहा है।
हिंदू संगठन ने कहा, ‘‘संविधान को स्वीकार करें, कानून का पालन करें और देश का सम्मान करें — यही असली सुरक्षा है।’’
एआईएमपीएलबी ने पिछले हफ्ते देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की थी जिसके तहत वह देश भर के बड़े शहरों में जनसभाएं और विरोध प्रदर्शन आयोजित करेगा।
मुस्लिम संगठन ने कहा कि वह मुसलमानों के साथ भेदभाव और संवैधानिक उल्लंघनों की कथित घटनाओं का ब्यौरा देने वाला एक विस्तृत ‘‘श्वेत पत्र’’ भी जारी करेगा।
विहिप के केंद्रीय संयुक्त सचिव विजय शंकर तिवारी ने एक बयान में कहा कि संविधान से ऊपर कोई पर्सनल लॉ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा, ‘‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भारत के संविधान की तुलना शरिया से की है, जो पूरी तरह से असंवैधानिक है।’’
भारत के संविधान के तहत, सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार प्राप्त हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन शरिया की तुलना संविधान से करना देश की एकता के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।’’
तिवारी ने कहा कि भारतीय नागरिक होने के नाते मुसलमानों को संविधान द्वारा दिए गए सभी अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन नागरिकता के साथ कुछ कर्तव्य भी जुड़े होते हैं, जिनमें देश के कानूनों को मानना, राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की भावना को समझना शामिल है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध संगठन ने कहा कि एआईएमपीएलबी का आंदोलन ‘‘देश को किसी भी तरह से मंजूर नहीं है और इस देश में ऐसा आंदोलन करने या ऐसी गतिविधियों करने की छूट नहीं दी जा सकती।’’
विहिप ने कहा, ‘‘इस तरह की तमाम साजिशें रची जा रही हैं और भविष्य में भी रची जाती रहेंगी। देश को सतर्क रहना होगा।’’
तिवारी ने मुसलमानों को उत्पीड़न का शिकार बताने वाली बात को खारिज करते हुए इसे ‘‘गुमराह करने वाली तस्वीर’’ बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘जब भी अवैध निर्माण गिराने की बात होती है, तो जिनके भी अवैध निर्माण होते हैं, उन्हें गिरा दिया जाता है। लेकिन अगर मुस्लिम समुदाय के अवैध निर्माण गिराए जाते हैं, तो वे खुद को पीड़ित के तौर पर प्रदर्शित करते हैं। ऐसा नहीं चल सकता।’’
तिवारी ने कहा कि वंदे मातरम् का सम्मान करना किसी धर्म पर हमला नहीं माना जा सकता। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के ‘‘जागरूक वर्ग’’ से अपील की कि वे अपने नेताओं के बयानों के आधार पर डर का माहौल न बनाएं।
भाषा सुभाष नरेश
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