देश में राजनीतिक नेतृत्व तैयार करने की कोई व्यवस्था नहीं: आर्लेकर

देश में राजनीतिक नेतृत्व तैयार करने की कोई व्यवस्था नहीं: आर्लेकर

देश में राजनीतिक नेतृत्व तैयार करने की कोई व्यवस्था नहीं: आर्लेकर
Modified Date: May 23, 2026 / 03:23 pm IST
Published Date: May 23, 2026 3:23 pm IST

पणजी, 23 मई (भाषा) तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने देश में नेताओं के लिए कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय नहीं होने पर शनिवार को अफसोस जताया और युवाओं से सार्वजनिक जीवन में आने से पहले खुद को ज्ञान एवं जागरूकता से लैस करने का आग्रह किया।

आर्लेकर ने यहां ‘राष्ट्रीय युवा संसद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर आत्मचिंतन करने की जरूरत पर बल दिया और कहा कि देश में अपने राजनीतिक नेतृत्व को तैयार करने की कोई प्रणाली नहीं है।

आर्लेकर ने गोवा के राज्यपाल पी. अशोक गजपति राजू के साथ इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

उन्होंने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी द्वारा अक्सर सुनाए जाने वाले एक प्रसंग और हिंदी कवि काका हाथरसी की एक व्यंग्यात्मक कविता का उल्लेख करते हुए राजनीति और अन्य पेशों के बीच अंतर को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि कार चलाने तक के लिए बुनियादी योग्यता, प्रशिक्षण और लाइसेंस की जरूरत होती है तथा कानून, चिकित्सा, शिक्षण और यहां तक कि शुरुआती स्तर की सरकारी नौकरियों जैसे पेशों में भी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता जरूरी होती है।

केरल का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे आर्लेकर ने कहा, ‘‘…लेकिन राजनीति में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है। बुनियादी शैक्षणिक योग्यता के बिना भी कोई व्यक्ति मंत्री बन सकता है।’’

उन्होंने कहा कि यह स्थिति गंभीर आत्मचिंतन की जरूरत को दर्शाती है, खासकर ऐसे समय में जब शासन और नीति-निर्माण के लिए गहरी समझ और जिम्मेदारी की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए प्रशिक्षण होता है, लेकिन नेता बनने के लिए कौन-सा प्रशिक्षण जरूरी है? दुर्भाग्य से, हमारे पास राजनीति में नेताओं में विकसित करने की कोई व्यवस्था नहीं है।’’

राज्यपाल ने कहा कि युवाओं को राजनीति में जागरूक नेतृत्व लाने के लिए खुद को तैयार करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजनीति में ऐसे कम से कम एक लाख समर्पित युवाओं को लाने का आह्वान किया है, जिन्हें भारत के इतिहास, भूगोल और संवैधानिक ढांचे की अच्छी समझ हो।

आर्लेकर ने कहा कि देश का भावी नेतृत्व ऐसी पीढ़ी से उभरना चाहिए, जो भारत की सांस्कृतिक एकता, ऐतिहासिक यात्रा और विकास संबंधी आकांक्षाओं को समझती हो।

आर्लेकर ने युवाओं से इस जिम्मेदारी को गंभीरता से लेने और सार्वजनिक जीवन में कदम रखने से पहले शिक्षा, जागरूकता तथा राष्ट्रीय उद्देश्य की भावना से खुद को लैस करने का आग्रह किया।

उन्होंने साथ ही कहा कि विकसित भारत का विचार केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शिक्षा, समाज और शासन में प्रगति भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ को समग्र और समावेशी विकास के रूप में समझा जाना चाहिए।

आर्लेकर ने कहा, ‘‘विकसित भारत का संबंध केवल आर्थिक विषयों से नहीं है। यह समग्र विकास से जुड़ा है।’’

उन्होंने कहा कि केवल एक क्षेत्र में प्रगति किसी राष्ट्र को विकसित नहीं बना सकती।

उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत उसकी विकास यात्रा के केंद्र में रहनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कला, विरासत और सामाजिक मूल्यों में प्रगति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

भाषा सिम्मी सुरेश

सुरेश


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