नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) राज्यसभा में मनोनीत सदस्य सुधा मूर्ति ने सोमवार को केंद्र सरकार से कर्नाटक के रायचूर जिले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान (एम्स) स्थापित करने का आग्रह करते हुए कहा कि उत्तर कर्नाटक लंबे समय से विकास की बाट जोह रहा है और वहां स्वास्थ्य ढांचे की स्थिति काफी कमजोर है।
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए सुधा मूर्ति ने कहा कि केंद्र सरकार ने कई राज्यों में एम्स स्थापित किए हैं, लेकिन कर्नाटक में अब तक एक भी एम्स नहीं बनाया गया है।
उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं कह रही हूं कि इसे हुबली या बेंगलुरु में बनाया जाए, बल्कि इसे रायचूर जिले में स्थापित किया जाना चाहिए।”
सुधा मूर्ति ने कहा कि रायचूर उन जिलों में शामिल है जिन्हें नीति आयोग ने देश के सबसे पिछड़े जिलों में चिह्नित किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर कर्नाटक क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षा का शिकार रहा है।
उन्होंने कहा कि दक्षिण कर्नाटक का विकास मैसुरु के वाडियार शासकों के कार्यकाल में हुआ, जबकि उत्तर कर्नाटक करीब 260 वर्षों से विकास के मामले में पिछड़ा रहा है।
सुधा मूर्ति ने कहा कि इस क्षेत्र में पर्याप्त अस्पताल अवसंरचना और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं, जिसके कारण मरीजों को इलाज के लिए दूर-दराज के शहरों का रुख करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि रायचूर और आसपास के इलाकों के लोग अक्सर इलाज के लिए हैदराबाद या बेंगलुरु जाते हैं।
उन्होंने कहा, “वहां के गरीब लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों में रहने वाले लोगों की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ता है।”
सुधा मूर्ति ने रायचूर जिले में शिक्षा की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जिले में साक्षरता दर काफी कम है, जहां महिला साक्षरता करीब 48 प्रतिशत और पुरुष साक्षरता करीब 60 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि रायचूर में एम्स की स्थापना से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बेहतर होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे और छात्रों को भी चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे।
मूर्ति ने कहा कि ऐसे संस्थानों की स्थापना से क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने में भी मदद मिल सकती है।
भाषा मनीषा अविनाश
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