नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) राज्यसभा में सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने घटते पूंजीगत व्यय पर चिंता जताते हुए कहा कि आम बजट 2026-27 में इसे बढ़ाने के लिए कुछ नहीं किया गया है तथा यह एक ऐसा बजट है जिसे भुला दिया जाना चाहिए।
उच्च सदन में चिदंबरम ने बजट 2026-27 पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सरकार ने पूंजीगत व्यय में कटौती है। उन्होंने कहा कि 1,44,376 करोड़ रूपये के पूंजीगत व्यय में कमी की गयी हैं जिसमें केंद्र के पूंजीगत व्यय में 25,335 करोड़ रूपये तथा राज्यों के पूंजीगत व्यय में 1,19,041 करोड़ रूपये की कमी हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकार को क्या इस बात का स्पष्टीकरण नहीं देना चाहिए कि राज्यों को धन क्यों नहीं दिया गया या कोष जारी करने के समय शर्तें क्यों लगायी गयीं ? उन्होंने कहा कि इस बारे में वित्त मंत्री के बजट भाषण में कोई कारण नहीं दिये गये हैं।
पूर्व वित्त मंत्री ने कहा कि दूसरी सबसे बड़ी चुनौती रोजगार है। उन्होंने कहा कि 20 प्रतिशत से कम कामकाजी आबादी नियमित क्षेत्र में कार्यरत हैं। चिदंबरम ने कहा कि 144 करोड़ लोगों की आबादी में से दो प्रतिशत से भी कम लोग कारखानों में कार्यरत हैं।
उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना बुरी तरह से विफल रही है और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को इस बारे में स्पष्टीकरण देना चाहिए।
चिदंबरम ने कहा कि धीमी विकास दर भी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि सुधार एक्सप्रेस भले ही बेपटरी नहीं हुई हो किंतु यह अटक अवश्य गयी है।
उन्होंने कहा कि यह भूल जाने वाला एक बजट है और सुखियों में अब न तो यह बजट रह गया है न वित्त मंत्री का भाषण। उन्होंने कहा कि सुर्खियों में इस समय एक अन्य मंत्री से जुड़े समझौते की खबरें छायी हुई हैं।
चिदंबरम ने दावा किया कि वित्त मंत्री ने पिछले साल संसद में किए गए वादों को पूरी तरह से भुला दिया है।
भाषा माधव मनीषा
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