लगातार भरोसेमंद न्यायिक फैसलों से आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए ‘न्याय-नॉमिक्स’ जरूरी: सीजेआई

लगातार भरोसेमंद न्यायिक फैसलों से आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए ‘न्याय-नॉमिक्स’ जरूरी: सीजेआई

लगातार भरोसेमंद न्यायिक फैसलों से आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए ‘न्याय-नॉमिक्स’ जरूरी: सीजेआई
Modified Date: August 22, 2026 / 03:36 pm IST
Published Date: August 22, 2026 3:36 pm IST

नयी दिल्ली, 22 अगस्त (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि देशों से जिस बड़े पैमाने पर आर्थिक वृद्धि बनाए रखने की उम्मीद की जाती है, वह केवल भौगोलिक स्थिति या संसाधनों के बूते संभव नहीं है तथा लगातार भरोसेमंद न्यायिक फैसलों के जरिए सभी को समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए ‘‘न्याय-नॉमिक्स’’ (न्याय के अर्थशास्त्र) की जरूरत है।

प्रधान न्यायाधीश ने यहां 11वें ‘ब्रिक्स प्लस लीगल फोरम’ को संबोधित करते हुए कहा कि संस्थाएं आर्थिक वृद्धि के इर्द-गिर्द खड़ा किया गया कोई अस्थायी ढांचा नहीं, बल्कि उसकी बुनियाद हैं।

इस मंच का विषय ‘आर्थिक मजबूती, नवोन्मेष और स्थिरता के लिए कानून के शासन की रूपरेखा एवं संस्थागत क्षमता निर्माण’ था।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि भारत की प्रगति में मजबूत संस्थाओं की अहम भूमिका है और इनमें न्यायपालिका की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है तथा यही बात ‘ब्रिक्स प्लस’ देशों पर भी लागू होती है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे देशों से जिस बड़े पैमाने पर आर्थिक वृद्धि बनाए रखने की उम्मीद है, वह केवल अनुकूल भौगोलिक स्थिति या संसाधनों के सहारे संभव नहीं है। इसके लिए ऐसी मजबूत संस्थाओं का होना जरूरी है, जिन पर भरोसा किया जा सके। शायद आंकड़े इस बात को शब्दों से बेहतर ढंग से स्पष्ट कर सकते हैं।’’

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘न्याय-नॉमिक्स यानी सरल शब्दों में न्याय का अर्थशास्त्र। न्यायिक फैसलों में निरंतरता और न्याय प्रक्रिया पर भरोसा लेन-देन की लागत कम करता है। इससे बाजार में सभी को बराबरी का अवसर मिलता है और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा मिलता है।’’

उन्होंने कहा कि भारत समेत ‘ब्रिक्स प्लस’ की किसी भी अर्थव्यवस्था ने केवल प्राकृतिक संसाधनों के बल पर प्रगति नहीं की है और इन देशों का विकास इस बात पर भी निर्भर करता है कि वहां किए गए वादों एवं समझौतों को कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अगर आज आप अपनी शब्दावली में एक नया शब्द शामिल करना चाहें तो वह ‘न्याय सेतु’ होना चाहए। यह ऐसा सेतु है जो 11 अलग-अलग कानूनी परंपराओं को जोड़ता है। इन सभी की यह साझा सोच है कि भरोसा अपने आप बनने का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उसे लगातार प्रयासों से मजबूत किया जाना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘संस्थाएं आर्थिक वृद्धि के बाद खड़ा किया जाने वाला सहायक ढांचा नहीं हैं, बल्कि वे उसकी बुनियाद हैं। अगर यह बुनियाद कमजोर हो तो तेजी से बढ़ती दिख रही अर्थव्यवस्था भी पहली बड़ी चुनौती के सामने डगमगा सकती है।’’

भाषा सिम्मी रंजन

रंजन


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